Monday, March 2, 2026
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नई कार-बाइक खरीददारों के लिए अच्छी खबर, 1 अप्रैल से लागू होगी रि-कॉल व्यवस्था, ऐसे होगा फायदा…

नई कार-मोटरसाइकिल खरीददारों के लिए अच्छी खबर है। यदि उनकी कार-कंपोनेंट में किसी प्रकार का विनिर्माण दोष है तो सरकार के रि-कॉल पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। निर्माता कंपनी बगैर किसी शुल्क के उसे ठीक करेगी अथवा नियम के अनुसार उपभोक्ता को नई कार दी जाएगी। इसके लिए उपभोक्ताओं को डीलर-वर्कशॉप के चक्कर काटने की जरुरत नहीं है। इसमें मैकेनिकल-इलेक्ट्रिकल, पार्ट, कंपोनेंट आदि शामिल है। यह सुविधा सात साल पुरानी हो चुकी कारों पर भी मिलेगी। नए नियम एक अप्रैल 2021 से लागू हो जाएंगे।

सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने पिछले हफ्ते इस बाबत अधिसूचना जारी कर दी है। इसके मुताबिक देश में एक अप्रैल से विनिर्माण दोषपूर्ण-त्रुटिपूर्ण वाहनों को वापस लेना अथवा उसे ठीक करना अनिवार्य कर दिया जाएगा। यह निर्भर करेगा कि वाहन में किस प्रकार की त्रुटि है। उपभोक्ता को नए वाहन अथवा ठीक करने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय व्हीकल रि-कॉल नामक पोर्टल शुरू करने जा रहा है। इसमें उपभोक्ता अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

शिकायत पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय जांच अधिकारी नियुक्त करेगा। व्हीकल रिकॉल नियम दो पहिया, तीन पहिया, चार पहिया निजी व व्यावसायिक वाहनों पर लागू होगा। खास बात यह है कि वाहन के पार्ट, कंपोनेंट, रेट्रोफिटिंग आदि त्रुटियां को शामिल किया गया है। इसमें वाहन निर्माता कंपनी यह बहाना नहीं बना सकेंगे कि पार्ट दूसरी कंपनी का है, इसमें हमारा दोष नहीं है। सभी प्रकार की त्रुटियां कंपनी को ठीक करनी होंगी अथवा नया वाहन देना होगा। नए नियम के दूसरे हिस्से में वाहन त्रुटि होने पर कंपनी को पूरी खेप वापस लेनी होगी। विनिर्माण के समय अथवा असेंबल के समय त्रुटि नहीं पकड़ने और बेचने के एवज में कंपनी पर 10 लाख से 100 लाख रुपये का जुर्माना तय किया गया है। यह राशि वाहन बिक्री की संख्या के अनुसार तय होगी। यह व्यवस्था पहली बार लागू होगी। ये जुर्माना वाहनों की बिक्री के आधार पर लगेगा।

सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने व्हीकल रि-कॉल व्यवस्था लागू करने की घोषणा की थी। लेकिन वाहन निर्माता कंपनियों के दबाव में इसमें देरी हो रही थी। नई व्यवस्था रिकॉल नोटिस मिलने पर कंपनी सिर्फ हाई कोर्ट जा सकती है। इसे लागू करने की पूरी जिम्मेदारी गडकरी के मंत्रालय के कंधों पर होगी।

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