Saturday, March 7, 2026
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शिक्षा विभाग में ट्रांसफर-पोस्टिंग घोटाला: पर्दे के पीछे ओहदेदार नेताओं से लेकर कई अधिकारी-कर्मचारियों के हाथ…सवाल यह कि कार्रवाई सिर्फ दो पर क्यों…जल्द ही बेनकाब होंगे जालसाज…

बिलासपुर। संभाग में शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग में हुए घोटाले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। सूत्रों में मानें तो इस घोटाले को सिर्फ संयुक्त संचालक और लिपिक ही नहीं, बल्कि दो दर्जन से अधिक लोगों ने मिल कर अंजाम दिया है। इस घोटाले में सत्ताधारी पक्ष के दो नेताओं से लेकर विपक्ष के भी कुछ लोगों के हाथ सने हुए हैं। इसका सबूत भी ताजाखबर36गढ़ को उपलब्ध कराया गया है। सबूत को परखने से सब कुछ दूध का दूध और पानी का पानी हो जा रहा है। इसका खुलासा हम जल्द ही करेंगे।

राज्य सरकार के निर्देश पर हाल ही में पूरे प्रदेश में थोक के भाव में सहायक शिक्षक एलबी को शिक्षक एलबी के पद पर पदोन्नति दी गई है। सरकार ने पदोन्नत शिक्षकों को पोस्टिंग देने में पारदर्शिता बरतने के लिए संभाग स्तर पर काउंसिलिंग करने का जिम्मा संभागीय अधिकारी को दिया था। काउंसिलिंग से पहले संभागभर में रिक्त पदों का खाका तैयार किया गया। काउंसिलिंग से पहले शहर के आसपास के स्कूलों में रिक्त पदों को अलग किया गया और दूरदराज के स्कूलों की अलग लिस्ट बनाई गई। इस काम को संयुक्त संचालक कार्यालय के चार कर्मचारियों के अलावा जिला शिक्षा विभाग और आदिवासी विभाग के कर्मचारियों ने अंजाम दिया। संभागीय कार्यालय की ओर से अलग-अलग तिथि में संभागभर के पदोन्नत शिक्षकों को उनके चुने हुए स्थानों पर पोस्टिंग दी गई। इसके बाद आसपास के स्कूलों में पदस्थापना कराने के लिए एक सिंडीकेट सक्रिय हुआ। इस सिंडीकेट में मुख्य भूमिका संभागीय कार्यालय के तीन लिपिकों ने निभाई। तीनों लिपिकों ने अपने भरोसेमंद पियादों का जाल संभागभर में बिछाया, जिन्हें ऐसे शिक्षकों की तलाश करने कहा गया था, जो आसपास के स्कूलों में पदस्थापना चाहते हैं। सारे पियादे काम कर गए। देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में शिक्षक मनचाही जगह पर पोस्टिंग लेने के लिए तैयार हो गए। फिर शुरू हुआ सौदे का खेल। भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि संयुक्त संचालक कार्यालय का एक लिपिक सौदा तय करता था और दूसरा लिपिक राशि एकत्रित करता था और तीसरे का काम पैसे को ठिकाना लगाने का था। शिक्षकों से वसूली होते ही संभागीय कार्यालय से पोस्टिंग का संशोधित आदेश निकलता, जिसे संबंधित शिक्षक तक पहुंचाने का जिम्मा सिंडीकेट में शामिल पियादों का था। इस तरह से देखते ही देखते करोड़ों रुपए का खेल हो गया।

सरकार तक ऐसे पहुंचा मामला
मीडिया में जो खबरें आ रही हैं, उसे मानें तो बीजेपी के एक कार्यकर्ता ने इस मामले का भंडाफोड़ किया है। उन्हीं की शिकायत का हवाला देते हुए जांच कराने सरकार से पत्र जारी हुआ है। पर सूत्रों की मानें तो इस मामले की भनक सरकार को दूसरे तरीके से मिली थी। सरकार से जुड़े कुछ पदाधिकारियों ने बात नहीं बनी तो उन्होंने इस बात को सरकार तक पहुंचाई, लेकिन जांच कराने के लिए एक आधार चाहिए था, जिसके लिए सरकार से जुड़े नेताओं ने ही बीजेपी के कार्यकर्ता को आगे किया।

मालामाल हो गए जिले के दो ओहदेदार नेता
ट्रांसफर-पोस्टिंग घोटाले को एक सोची-समझी साजिश की तरह अंजाम दिया गया है। दरअसल, मनचाही जगह पर पोस्टिंग नहीं पाने से हताश शिक्षकों ने राजनीतिक रसूख तक पहुंच लगाई। सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष में बैठे नेताओं को अर्जियां दी गईं। राजनीतिज्ञों की ओर से कई शिक्षकों की पोस्टिंग में संशोधन करने का पत्र भी चला। यहीं पर घोटाले को अंजाम देने वाले सिंडीकेट के बीच में एक पेंच फंस गया। यदि इन नेताओं के पत्र को दरकिनार कर संशोधन आदेश निकाला गया तो बाद में उन्हें लेने के देने पड़ सकते हैं। इसके लिए बीच का रास्ता निकाला गया। जिले के कुछ नेताओं को संशोधन की कुछ सीटें बांट दी गईं। इसमें जिले के दो नेताओं को कुछ ज्यादा ही तवज्जो दी गई। इन नेताओं की सिफारिशी पत्र पर 100 से अधिक संशोधित आदेश निकाला गया है।

फिर सिर्फ दो पर ही कार्रवाई क्यों
करोड़ों रुपए के घोटाले सिर्फ संयुक्त संचालक प्रसाद और सहायक ग्रेड दो विकास तिवारी ही अंजाम दे देते, यह बात गले के नीचे नहीं उतर रही है। एक लिपिक की इतनी बखत नहीं कि वह 700 से अधिक शिक्षकों से संपर्क कर राशि एकत्रित कर ले। जाहिर है, इस सिंडीकेट में दो दर्जन से अधिक लोग शामिल रहे होंगे, लेकिन पूरी पिक्चर में संयुक्त संचालक और सहायक ग्रेड दो ही विलेन की तरह सामने नजर आए, जिन पर कार्रवाई भी हो गई है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर कार्रवाई की जद में ये दोनों ही क्यों आए। बाकी को क्यों छोड़ दिया गया। सूत्र बताते हैं कि इस घोटाले में शामिल लोगों की भी कुंडली बन रही है, जल्द ही ये लोग भी बेनकाब होंगे। ताजाखबर36गढ़ के पास सिंडीकेट में शामिल आधा दर्जन लोगों के नाम हैं, जिसका खुलासा जल्द ही किया जाएगा।

ये शिक्षक हैं…सब जानते हैं…
यह तो जगजाहिर है, शिक्षक सबसे ज्यादा चालाक, होशियार और समझदार होते हैं। यह एक ऐसी प्रजाति है, जो कुछ भी करने से पहले कई बार अच्छे-बुरे परिणाम के बारे में मंथन करते हैं। जाहिर है, संशोधन आदेश पाने के लिए पसीने की गाढ़ी कमाई देने का सबूत भी इन लोगों ने रखा होगा। सूत्र बताते हैं कि हरेक शिक्षक के पास सौदे का वाइस या फिर वीडियो रिकार्डिंग है, जिसे वे समय आने पर पेश करेंगे।

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