Monday, March 16, 2026
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छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने की एक देश-एक चुनाव की समर्थन, बोले- इस आइडिया का स्वागत है…

केंद्र सरकार ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की संभावना तलाशने के लिए पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। जिसके तहत आम चुनाव और राज्य विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की बात कही गई है। छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने एक देश एक चुनाव के मुद्दे का समर्थन करते हुए कहा कि व्यक्तिगत रूप से मैं एक देश, एक चुनाव का स्वागत करता हूं। उन्होंने कहा कि यह आइडिया नया नहीं, पुराना ही है।

सूत्रों ने बताया कि समिति इस संबंध में कानून लाने की संभावना तलाशेगी। एक संसदीय स्थायी समिति, विधि आयोग और नीति आयोग ने पहले ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ प्रस्ताव की जांच की थी और इस विषय पर रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि अभी तो समिति बनी है, इतना घबराने की बात क्या है? समिति की रिपोर्ट आएगी, फिर पब्लिक डोमेन में चर्चा होगी। संसद में चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि घबराने की बात क्या है? बस समिति बनाई गई है, इसका मतलब यह नहीं है कि यह कल से ही हो जाएगा।

संसद का विशेष सत्र
सरकार ने 18-22 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि इस सत्र में सरकार ‘एक देश एक चुनाव पर बिल ला सकती है। मोदी सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर कमेटी का भी गठन किया है। हालांकि, इसमें कौन-कौन सदस्य होंगे इस बारे में जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

इस साल के अंत में पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं और 2024 में होने वाले आम चुनावों के साथ कुछ और राज्यों में चुनाव होने हैं। ऐसे में अगर ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ लागू होता है तो इसका मतलब हो सकता है कि पूरे भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होंगे और मतदान भी एक ही समय पर होगा।

चुनावी घोषणापत्र में उठाई थी बात
गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने अपने 2014 के चुनावी घोषणापत्र में कहा था कि वह राज्य विधानसभाओं और लोकसभा दोनों के लिए एक साथ चुनाव कराने की एक पद्धति विकसित करने की कोशिश करेगी। दिसंबर 2022 में विधि आयोग ने देश में एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव पर राजनीतिक दलों, भारत के चुनाव आयोग, नौकरशाहों और अन्य विशेषज्ञों की राय मांगी थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार एक राष्ट्र, एक चुनाव का विचार सामने रख चुके हैं। नवंबर 2020 में अधिकारियों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था, “एक राष्ट्र, एक चुनाव न केवल बहस का मुद्दा है बल्कि भारत के लिए एक जरूरत है। भारत में हर महीने चुनाव होता है, जिससे विकास बाधित होता है। देश को इतना पैसा क्यों बर्बाद करना चाहिए?” पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने भी 2017 में राष्ट्रपति बनने के बाद इसका समर्थन किया था। साल 2018 में संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था, ‘‘लगातार चुनाव से न सिर्फ मानव संसाधन पर अत्यधिक बोझ पड़ता है बल्कि चुनाव आचार संहिता लागू हो जाने से इन विकास कार्यों को पूरा करने की प्रक्रिया भी बाधित होती है।”

हालांकि, लोकसभा चुनाव में भाजपा का विरोध करने के लिए एक संयुक्त गठबंधन पर काम कर रहे विपक्षी गठबंधन INDIA ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है।

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