छत्तीसगढ़

भिलाई विधायक देवेन्द्र यादव के भाई धर्मेंद्र यादव के कालीबाड़ी हाउसिंग बोर्ड की जमीन कब्जा मामले पर हाईकोर्ट का निर्णय…

High Court's decision on the case of occupation of Kalibari Housing Board land by Dharmendra Yadav, brother of Bhilai MLA Devendra Yadav...

बिलासपुर। भिलाई के कालीबाड़ी हाउसिंग बोर्ड की जमीन से संबंधित एक मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने विधायक देवेंद्र यादव के भाई धर्मेंद्र यादव के खिलाफ दायर याचिकाओं को निराकृत कर दिया है। यह मामला कालीबाड़ी हाउसिंग बोर्ड की एक जमीन से जुड़ा है, जिसे धर्मेंद्र यादव ने 2 करोड़ 52 लाख रुपये में खरीदा था। इस खरीद के खिलाफ तीन याचिकाएं दाखिल की गई थीं, जिनमें से एक जनहित याचिका आम आदमी पार्टी के नेता मेहरबान सिंह द्वारा दायर की गई थी, जबकि अन्य दो याचिकाएं उदय सिंह और पीयूष मिश्रा द्वारा दाखिल की गई थीं।

धर्मेंद्र यादव ने कालीबाड़ी हाउसिंग बोर्ड से 15,000 वर्ग फीट जमीन खरीदी थी, जिसे लेकर याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्होंने जरूरत से ज्यादा जमीन पर कब्जा कर लिया है। याचिकाओं में यह भी दावा किया गया कि यह जमीन अत्यधिक सस्ते दामों पर खरीदी गई थी। इस विवाद ने राजनीतिक और कानूनी विवाद को जन्म दिया, जिसके चलते यह मामला हाई कोर्ट में पहुंचा।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने सभी याचिकाओं पर एकसाथ सुनवाई की। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों को सुना और याचिकाकर्ताओं को संबंधित प्राधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता और जनहित याचिका में हस्तक्षेपकर्ता को दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा, जिसके बाद संबंधित प्राधिकारी को छह सप्ताह के भीतर इस मामले का निराकरण करना होगा। इसके अलावा, आठ सप्ताह तक जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिसका मतलब यह है कि फिलहाल किसी भी प्रकार की गतिविधि नहीं की जाएगी।

यह मामला न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें भिलाई के विधायक देवेंद्र यादव के भाई धर्मेंद्र यादव की संलिप्तता है। जमीन की खरीद-फरोख्त और कब्जे से जुड़े ऐसे विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं, और इनका असर स्थानीय राजनीति और प्रशासन पर भी पड़ता है। इस मामले में हाई कोर्ट के निर्देश से यह साफ हो गया है कि न्यायालय इस विवाद का समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत करेगा।

अब सभी याचिकाकर्ताओं को दो सप्ताह के भीतर अधिकृत प्राधिकारी के समक्ष अपनी बात रखनी होगी। प्राधिकारी को छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेना है। फिलहाल, आठ सप्ताह तक किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जा सकेगा, जिससे यथास्थिति बनी रहेगी।

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