Wednesday, March 18, 2026
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बिलासपुर पुलिस की कथित ज्यादती के खिलाफ न्याय की मांग: नायब तहसीलदार पुष्पराज मिश्रा ने उठाई आवाज…

बिलासपुर, 31 दिसंबर 2024। बिलासपुर के नायब तहसीलदार पुष्पराज मिश्रा ने 17 नवंबर 2024 की रात सरकंडा थाना में उनके साथ हुई कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के खिलाफ न्याय की गुहार लगाई है। आज बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने अपनी आपबीती सुनाई और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।

मिश्रा ने बताया कि घटना की रात उन्हें और उनके भाई को सरकंडा थाना लाया गया, जहां उनके साथ न केवल शारीरिक हिंसा की गई बल्कि अभद्र भाषा का भी प्रयोग हुआ। उन्होंने थाना प्रभारी तोपसिंह नवरंग पर आरोप लगाया कि उन्होंने न केवल उनके साथ दुर्व्यवहार किया, बल्कि उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई।

मिश्रा का कहना है कि घटना के बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की थी। पुलिस अधीक्षक ने झूठे एफआईआर को तीन दिन में समाप्त करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

सीसीटीवी फुटेज और साक्ष्य का मुद्दा
पुष्पराज मिश्रा ने सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें पुलिस थानों में ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकंडा थाना में ऑडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं है, जिससे घटना के साक्ष्य अधूरे हैं। मिश्रा ने मांग की है कि घटना की रात के सीसीटीवी फुटेज को ऑडियो सहित सार्वजनिक किया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

जांच प्रक्रिया पर सवाल
मिश्रा ने विभागीय जांच में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें अब तक प्रारंभिक जांच रिपोर्ट और आरोप पत्र की प्रति नहीं सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना चाहिए और उन्हें न्याय दिलाने के लिए साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने चाहिए।

मांग और अपील
नायब तहसीलदार पुष्पराज मिश्रा ने मांग की है कि:
1. झूठे एफआईआर को तुरंत समाप्त किया जाए।
2. दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
3. घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज को ऑडियो सहित सार्वजनिक किया जाए।
4. विभागीय जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया जाए।

न्याय की उम्मीद
प्रेस वार्ता के दौरान मिश्रा ने कहा कि वह सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि उस व्यवस्था में सुधार के लिए आवाज उठा रहे हैं, जिसमें आम नागरिकों को न्याय पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने राज्य सरकार और प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है।

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