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चंदे, चढ़ावे और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर कांग्रेस का हमला; प्रधानमंत्री से जवाब, एफआईआर, फॉरेंसिक ऑडिट और नए ट्रस्ट के गठन की उठाई मांग…

बिलासपुर, 16 जुलाई। भगवान राम के नाम पर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं से जुटाए गए चंदे और अयोध्या के राम मंदिर में लगातार बढ़ रहे चढ़ावे को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने गुरुवार को प्रेसवार्ता कर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, वित्तीय पारदर्शिता और चंदे के उपयोग पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है।

रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि यह केवल पैसों का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा विषय है। उनका आरोप है कि मंदिर निर्माण के लिए देशभर से एकत्र किए गए चंदे और वर्तमान में मंदिर में प्राप्त हो रहे चढ़ावे के उपयोग को लेकर अब तक पूरी पारदर्शिता सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि जिस राम मंदिर को देश की आस्था का सबसे बड़ा प्रतीक बताया गया, उसी से जुड़े आर्थिक मामलों पर सवाल उठना बेहद गंभीर विषय है।

कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), विश्व हिंदू परिषद और भाजपा पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राम मंदिर के नाम पर देशभर में बड़े पैमाने पर चंदा संग्रह किया गया, लेकिन उस धन का पूरा और पारदर्शी हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया। पार्टी ने दावा किया कि जनता के सामने हर रुपये का विवरण आना चाहिए, क्योंकि यह धन श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है।

प्रेसवार्ता में कांग्रेस नेताओं ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कुछ पूर्व पदाधिकारियों के इस्तीफों का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि यदि ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी थी, तो आखिर इस्तीफों की नौबत क्यों आई? कांग्रेस ने कहा कि विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और समय-समय पर सामने आए घटनाक्रमों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता को और मजबूत कर दिया है।

पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि ट्रस्ट के गठन और उसकी प्रशासनिक व्यवस्था में केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, इसलिए सरकार अपनी जिम्मेदारी से अलग नहीं हो सकती। यदि किसी प्रकार की कोई अनियमितता नहीं हुई है, तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने में किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे मामले पर देश के सामने अपना पक्ष रखें।
  • कथित अनियमितताओं से जुड़े प्रभावशाली लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए।
  • सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए।
  • वर्तमान ट्रस्ट को भंग कर नया पारदर्शी और जवाबदेह ट्रस्ट गठित किया जाए।
  • मंदिर निर्माण, चंदे, चढ़ावे और खर्च का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

कांग्रेस ने कहा कि भगवान राम किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था के केंद्र हैं। इसलिए राम मंदिर से जुड़े हर आर्थिक पहलू में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना लोकतंत्र और श्रद्धालुओं, दोनों के हित में है। पार्टी का कहना है कि धार्मिक आस्था के नाम पर जुटाए गए धन के उपयोग को लेकर यदि कोई सवाल उठते हैं, तो उनका निष्पक्ष और विश्वसनीय जवाब देश को मिलना चाहिए।

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