Tuesday, March 17, 2026
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संविधान: प्रजा से नागरिक तक का सफर बिलासपुर में “भारतीय संविधान में अंतर्निहित मूल्य” पर आयोजित व्याख्यान…

बिलासपुर। भारतीय संविधान, एक ऐसा दस्तावेज़ है जो न केवल देश की शासन प्रणाली की आधारशिला रखता है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को एक गरिमापूर्ण नागरिक के रूप में स्थापित करने का प्रयास भी करता है। इसी विषय पर रविवार को बिलासपुर प्रेस क्लब और पार्क फाउंडेशन छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण व्याख्यान आयोजित हुआ। इस व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर मोहम्मद आरिफ ने भारतीय संविधान की अंतर्निहित गहराइयों और मूल्यों पर विचार साझा किए।

भारतीय संविधान: लोकतंत्र की आत्मा: प्रो. मोहम्मद आरिफ ने अपने व्याख्यान में कहा कि भारतीय संविधान का निर्माण एक ऐतिहासिक प्रक्रिया थी, जिसमें व्यापक विचार-विमर्श और जनहित को सर्वोपरि रखने का प्रयास हुआ। उन्होंने बताया कि संविधान का उद्देश्य प्रजा को नागरिक बनाना है, यानी शासित और शोषित की मानसिकता से बाहर निकालकर अधिकार, कर्तव्य और गरिमा से युक्त एक स्वतंत्र और समान समाज का निर्माण करना।

संविधान के मुख्य मूल्य: स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व: संविधान के मूलभूत सिद्धांतों की चर्चा करते हुए प्रो. आरिफ ने बताया कि इसमें स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की भावना को केंद्र में रखा गया है। ये मूल्य न केवल एक आधुनिक और समतामूलक समाज की नींव रखते हैं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपराओं से भी गहराई से जुड़े हैं। बंधुत्व का मूल्य, जो समाज को जोड़ने का काम करता है, स्वतंत्रता संग्राम का भी एक प्रमुख प्रेरक रहा है।

संविधान की प्रासंगिकता और चुनौतियाँ: प्रोफेसर आरिफ ने वर्तमान समय में संविधान की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि आज जब वैचारिक कटुता और लोकतंत्र की अनदेखी के किस्से सामने आते हैं, तब संविधान के मूल्यों को समझने और लागू करने की आवश्यकता और बढ़ जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान को लागू करने में बाधा तब आती है, जब निजी स्वार्थ और सत्ता का लोभ लोकतांत्रिक मूल्यों पर हावी हो जाता है।

राष्ट्रीय एकता और न्यायपालिका की भूमिका: राष्ट्रीय एकता को सर्वोपरि बताते हुए प्रो. आरिफ ने कहा कि संविधान ने न्यायपालिका को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाया है, ताकि वह किसी भी दबाव या प्रभाव से मुक्त होकर काम कर सके। यह न्यायपालिका ही है, जो संविधान की आत्मा को बनाए रखने और देश में विधि का शासन सुनिश्चित करने में मदद करती है।

कार्यक्रम के प्रमुख बिंदु: कार्यक्रम का संचालन बिलासपुर प्रेस क्लब के कोषाध्यक्ष प्रतीक वासनिक ने किया, जबकि वरिष्ठ पत्रकार नथमल शर्मा ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान पर चर्चा की आवश्यकता क्यों पड़ रही है, इस पर भी विचार करना चाहिए। इस अवसर पर विभिन्न पत्रकार, अधिवक्ता, और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

यह व्याख्यान भारतीय संविधान की अद्वितीयता, उसकी दूरदृष्टि और उसमें निहित मूल्यों को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर था। संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह देश के हर नागरिक के लिए समानता, स्वतंत्रता और गरिमापूर्ण जीवन की गारंटी भी है। आज की चुनौतियों के बीच इसे समझना और लागू करना समय की मांग है।

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