बिलासपुर। चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और शुद्धता की बात हर बार होती है, लेकिन मतदाता सूची में हुई एक गंभीर लापरवाही ने पूरी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला कांग्रेस कमेटी बिलासपुर के पूर्व अध्यक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय केशरवानी का नाम बिलासपुर की जगह भिलाई नगर वार्ड क्रमांक 54 की मतदाता सूची में दर्ज कर दिया गया है।
विजय केशरवानी नर्मदा नगर, बिलासपुर के स्थाई निवासी हैं और लंबे समय से यहीं निवासरत हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में वे बेलतरा विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी भी रह चुके हैं। पूर्व पार्षद होने के साथ‐साथ उनके सभी चुनावी दस्तावेजों में स्थाई पता नर्मदा नगर ही दर्ज है।
जानकारी के अनुसार, एसआईआर के तहत ऑनलाइन अपडेट चेक करने पर पता चला कि उनका नाम नर्मदा नगर की सूची से हटकर सीधे भिलाई नगर के वार्ड 54 में दर्ज कर दिया गया है। जबकि उनके परिवार के अन्य सदस्यों के नाम अभी भी नर्मदा नगर की मतदाता सूची में दर्ज हैं।
अचरज की बात यह है कि भिलाई नगर की बीएलओ द्वारा उनके नाम की पुष्टि कर दी गई है, जबकि बीएलओ के सत्यापन का अधिकार और जिम्मेदारी वही होती है जो संबंधित क्षेत्र में तैनात हो। यानी जिनका पता बिलासपुर नर्मदा नगर है, उनकी पुष्टि भिलाई नगर की बीएलओ द्वारा कैसे और किस आधार पर की गई—यह बड़ा सवाल खड़ा करती है।
जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा ऑनलाइन जांच करने पर जो SMS मिला उसमें लिखा था––
“छत्तीसगढ़ राज्य की बीएलओ जी मोहन देवी द्वारा इस मानचित्रण की पुष्टि पहले ही प्रणाली में की जा चुकी है।”
उक्त एसएमएस में स्पष्ट रूप से भिलाई नगर वार्ड 53/54 के अंतर्गत पंजीकरण का जिक्र किया गया है।

विजय केशरवानी ने कहा कि उन्होंने अपनी और परिवार की जानकारी विधिवत बीएलओ को सौंपकर दस्तावेज जमा किए थे। ऐसे में नाम का दूसरे शहर की मतदाता सूची में दर्ज होना गंभीर लापरवाही है और इससे यह भी सवाल खड़ा होता है कि जिन लोगों ने ऑनलाइन अपडेट नहीं किया, और केवल बीएलओ के भरोसे रहे, उनका क्या?
निर्वाचन आयोग के लिए बड़ा सवाल
- क्या मतदाता को बिना सूचना उसकी वोटिंग लोकेशन बदली जा सकती है?
- एक शहर के निवास का सत्यापन दूसरे शहर की बीएलओ द्वारा कैसे किया गया?
- यदि यह चूक एक प्रभावी राजनीतिक व्यक्ति के साथ हो सकती है तो सामान्य मतदाता के साथ क्या हो सकता है?
जांच और सुधार की मांग
विजय केशरवानी इस मामले में बिलासपुर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी को लिखित शिकायत देने जा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि उनका नाम तत्काल बिलासपुर नर्मदा नगर की मतदाता सूची में पुनः जोड़ा जाए और इस लापरवाही की जांच आवश्यक है।
एसआईआर में गंभीर अव्यवस्था
तथ्य यह साफ हो गया है कि एसआईआर प्रक्रिया में कहीं न कहीं बड़ी तकनीकी अथवा प्रशासनिक चूक हो रही है, जिससे सिर्फ मतदाता अधिकार ही प्रभावित नहीं होंगे बल्कि चुनावी पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।
चुनाव आयोग को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय करनी होगी, क्योंकि यह सिर्फ एक नाम की गलती नहीं, बल्कि मताधिकार जैसे संवैधानिक अधिकार के साथ खिलवाड़ है।


