बिलासपुर |
जिले के कोटा थाना क्षेत्र में एक मामूली विवाद ने भयावह रूप लेते हुए हत्या जैसी गंभीर वारदात का रूप ले लिया। लकड़ी चोरी और होलिका दहन को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने पूर्व नियोजित साजिश के तहत एक व्यक्ति की निर्मम हत्या कर दी। हालांकि, पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए महज 24 घंटे के भीतर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मृतक मोहन पाण्डेय का कुछ समय पहले आरोपी राजाराम साहू से विवाद हुआ था। आरोप है कि मोहन पाण्डेय ने राजाराम पर घर की लकड़ी चोरी कर उसे होलिका में जलाने का आरोप लगाया था, जिस पर दोनों के बीच कहासुनी और मारपीट हुई थी। इसी बात से आक्रोशित होकर आरोपियों ने बदला लेने की योजना बना डाली।
बताया जा रहा है कि 22 मार्च 2026 को आरोपियों ने पहले से घात लगाकर मोहन पाण्डेय के घर पहुंचकर टांगिया, लाठी और डंडों से उस पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। सिर पर गंभीर वार होने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने शव को घसीटकर घर के अंदर से आंगन में फेंक दिया, जिससे घटना की क्रूरता और स्पष्ट हो जाती है।
घटना के दौरान मृतक के साथी शरद कौशिक ने पूरी वारदात देखी। जब उसने भागने की कोशिश की तो आरोपियों ने उस पर भी हमला कर दिया, जिसमें वह घायल हो गया, लेकिन किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहा।
मामले की सूचना मिलते ही कोटा थाना पुलिस ने तत्काल अपराध पंजीबद्ध कर वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया। उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देश तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) और अनुविभागीय अधिकारी नुपूर उपाध्याय के मार्गदर्शन में पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 23 मार्च को सभी 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों में राजाराम साहू, देवीप्रसाद साहू, प्रदीप साहू, आशा बाई साहू, वृंदा बाई साहू और चैतराम साहू शामिल हैं। पुलिस ने उनके कब्जे से हत्या में प्रयुक्त एक लोहे का टांगिया और लकड़ी का फंटा भी जब्त किया है।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1), 115(2), 296, 351(3), 190, 191(3), 331(7) और 332 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक नरेश चौहान, प्रधान आरक्षक सत्य प्रकाश यादव सहित पुलिस टीम के अन्य जवानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि छोटी-सी रंजिश और आपसी विवाद किस तरह गंभीर अपराध का रूप ले सकते हैं, वहीं पुलिस की तत्परता ने मामले में त्वरित न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम उठाया है।


