Thursday, April 30, 2026
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फर्जी पेमेंट के स्क्रीनशॉट से 17.84 लाख की ठगी का बड़ा खेल बेनकाब: अनाज व्यापारी को महीनों तक बनाता रहा शिकार, आरोपी गिरफ्तार…

बिलासपुर। जिले के थाना तारबाहर क्षेत्र में अनाज व्यापार से जुड़ी एक बड़ी ठगी का खुलासा हुआ है, जहां फर्जी भुगतान के स्क्रीनशॉट दिखाकर आरोपी ने व्यापारी को करीब 17.84 लाख रुपये का चूना लगा दिया। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

पुलिस के अनुसार, प्रार्थी संदीप अग्रहरि, जो व्यापार विहार बिलासपुर में अनाज का थोक व्यापार करते हैं, ने शिकायत दर्ज कराई थी कि भटगांव निवासी आरोपी राजेंद्र खांडेकर, जो अक्षांश किराना भंडार का संचालन करता है, ने नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच कई बार अनाज का ऑर्डर दिया। हर बार आरोपी द्वारा मोबाइल के माध्यम से भुगतान किए जाने के फर्जी स्क्रीनशॉट भेजे जाते रहे, जिससे विश्वास में आकर व्यापारी ने लगातार माल सप्लाई किया।

प्रार्थी ने अलग-अलग तिथियों में कुल 17,84,000 रुपये का अनाज आरोपी के पते पर ट्रांसपोर्ट के जरिए भेजा, लेकिन जांच में सामने आया कि आरोपी द्वारा भेजे गए सभी भुगतान स्क्रीनशॉट फर्जी थे और व्यापारी के खाते में एक भी राशि जमा नहीं हुई थी। करीब पांच महीने तक यह सिलसिला चलता रहा और अंततः खुद को ठगा महसूस होने पर व्यापारी ने पुलिस की शरण ली।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) पंकज कुमार पटेल और नगर पुलिस अधीक्षक गगन कुमार के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी निरीक्षक रविन्द्र अनंत के नेतृत्व में टीम गठित की गई। टीम ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए आरोपी राजेंद्र खांडेकर (32 वर्ष), निवासी झूमरपाली भटगांव, जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक मोबाइल, एक लैपटॉप, तीन कट्टी अरहर दाल, चार कट्टी गेहूं और 74 कट्टी चावल जब्त किया है। आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 89/2026 के तहत धारा 318(4), 338, 339, 340(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच जारी है।

इस पूरी कार्रवाई में निरीक्षक रविन्द्र अनंत, एएसआई संजय शर्मा, प्रधान आरक्षक जय सिंह ध्रुवे और आरक्षक रूपलाल चंद्रा की सराहनीय भूमिका रही।

पुलिस ने व्यापारियों से अपील की है कि वे किसी भी लेन-देन में केवल स्क्रीनशॉट पर भरोसा न करें, बल्कि बैंक खाते में वास्तविक भुगतान की पुष्टि के बाद ही माल की आपूर्ति करें, ताकि इस तरह की ठगी से बचा जा सके।

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