Homeक्राइमरिश्वतखोरी का खेल बेनकाब: विकास की रकम पर अफसरों का कमीशन राज,...

रिश्वतखोरी का खेल बेनकाब: विकास की रकम पर अफसरों का कमीशन राज, ACB के जाल में फंसे CEO, बाबू और चपरासी…

प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं गांवों के विकास और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन जब इन्हीं योजनाओं की राशि जारी करने के नाम पर सरकारी अधिकारी कमीशनखोरी का खेल खेलने लगें, तब सवाल सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं बल्कि ग्रामीण विकास की पूरी व्यवस्था पर लगने वाले दाग का होता है।

सक्ती जिले में सामने आया ताजा मामला इसी कड़वी सच्चाई को उजागर करता है। जनपद पंचायत सक्ती के सीईओ, एक बाबू और एक चपरासी को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोप है कि प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत स्वीकृत 12 लाख रुपये का चेक जारी करने के एवज में दो लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि विकास कार्यों के लिए स्वीकृत राशि का एक हिस्सा अधिकारियों द्वारा “कमीशन” के रूप में मांगा जा रहा था। यानी गांव की सड़क, नाली, घाट और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए मिलने वाली सरकारी राशि पर भ्रष्टाचार का ग्रहण लग चुका था।

ACB की कार्रवाई से यह भी स्पष्ट हुआ कि रिश्वतखोरी का यह खेल सुनियोजित तरीके से संचालित हो रहा था। शिकायत के अनुसार पहली किस्त के रूप में एक लाख रुपये पहले ही लिए जा चुके थे और बाकी राशि की वसूली की तैयारी चल रही थी। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि कई स्तरों पर फैला हुआ नेटवर्क बन चुका है।

गौरतलब है कि शिकायतकर्ता ने हिम्मत दिखाते हुए रिश्वत देने के बजाय ACB का दरवाजा खटखटाया। यदि वह भी व्यवस्था के दबाव में आकर पैसे दे देता तो यह मामला शायद कभी सामने नहीं आता। यही कारण है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में जागरूक नागरिकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर विकास योजनाओं की राशि लाभार्थियों और पंचायतों तक बिना बाधा और बिना भ्रष्टाचार के क्यों नहीं पहुंच पा रही है? जब एक चेक जारी कराने के लिए लाखों रुपये की रिश्वत मांगी जाए, तो छोटे गांवों के जनप्रतिनिधि और आम लोग न्याय की उम्मीद किससे करें?

ACB की यह कार्रवाई निश्चित रूप से एक बड़ा संदेश है कि भ्रष्टाचार चाहे किसी भी स्तर पर हो, कानून के हाथ वहां तक पहुंच सकते हैं। लेकिन केवल गिरफ्तारी ही समाधान नहीं है। जरूरत इस बात की है कि ऐसे मामलों में त्वरित न्याय हो, दोषियों को कठोर सजा मिले और सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए।

सक्ती का यह मामला सिर्फ तीन कर्मचारियों की गिरफ्तारी की खबर नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था का आईना है जहां विकास की रकम पर भी कमीशनखोरी की नजर लगी हुई है। सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित होगी या फिर कुछ दिनों बाद सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा?

spot_img

advertisement

spot_img
RELATED ARTICLES

Recent posts