बिलासपुर। शहर के सराफा बाजार में सोने की कीमत और बिक्री से आगे अब शुद्धता, विज्ञापन और कारोबार में पारदर्शिता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। बड़े ब्रांडेड ज्वेलरी शोरूमों के बढ़ते प्रभाव और ‘सस्ता सोना’, ‘Zero Making Charge’ तथा ‘Exchange Offer’ जैसे आकर्षक ऑफरों को लेकर छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन ने केंद्र सरकार का दरवाजा खटखटाया है। एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री कार्यालय को संबोधित ज्ञापन कलेक्टर बिलासपुर के माध्यम से भेजकर पूरे देश में ज्वेलरी कारोबार की निष्पक्ष जांच और स्थानीय सराफा व्यापारियों व पारंपरिक स्वर्ण कारीगरों के हितों की सुरक्षा के लिए ठोस कानूनी एवं नीतिगत व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
एसोसिएशन ने बिलासपुर के एक Malabar Gold & Diamonds शोरूम से जुड़े अगस्त माह के कथित प्रकरण को गंभीरता से उठाया है। संगठन के मुताबिक, एक ग्राहक के 22 कैरेट HUID युक्त स्वर्ण आभूषण की शोरूम में जांच के दौरान उसे 20 कैरेट बताया गया। इसके बाद संबंधित सराफा व्यापारी द्वारा दोबारा जांच कराए जाने पर वही आभूषण 916 यानी 22 कैरेट HUID युक्त पाया गया।
एसोसिएशन ने इस पूरे मामले को उपभोक्ता विश्वास और स्वर्ण की शुद्धता से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, यह एसोसिएशन द्वारा उठाया गया आरोप है और इसकी वास्तविकता का निर्धारण सक्षम जांच के बाद ही हो सकेगा।
सराफा एसोसिएशन का कहना है कि ब्रांडेड ज्वेलरी कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर विज्ञापन कर ‘सस्ता सोना’, ‘Zero Making Charge’, कम दरों पर सोना और ‘Exchange Offer’ जैसे ऑफर प्रचारित किए जाते हैं। संगठन ने स्पष्ट किया कि उसे वैध कारोबारी प्रतिस्पर्धा से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन विज्ञापनों में यदि ऐसी भाषा या अधूरी जानकारी इस्तेमाल होती है जिससे ग्राहकों में स्थानीय सराफा कारोबारियों के प्रति गलत धारणा बनती है, तो इसका सीधा असर छोटे और मध्यम व्यापारियों के कारोबार पर पड़ता है।
एसोसिएशन ने सरकार से ऐसे विज्ञापनों की तथ्यात्मक और नियामकीय जांच कराने की मांग की है, ताकि ग्राहक को ऑफर की वास्तविक शर्तों, मेकिंग चार्ज, शुद्धता और अंतिम कीमत की पूरी जानकारी मिल सके।
एसोसिएशन ने देशभर में सोने के भाव में पारदर्शिता लाने के लिए BIS/Hallmark व्यवस्था के माध्यम से दैनिक संदर्भ दर सार्वजनिक करने की मांग की है। इसके साथ ही सभी ज्वेलरी प्रतिष्ठानों में समान और पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था लागू करने की मांग रखी गई है।
संगठन के मुताबिक, ग्राहक के बिल में सोने का वजन, शुद्धता, HUID, मेकिंग चार्ज, GST और अंतिम देय राशि स्पष्ट रूप से दर्ज होनी चाहिए, ताकि खरीदारी के बाद किसी प्रकार का भ्रम या विवाद पैदा न हो।
सराफा एसोसिएशन ने उपभोक्ताओं को स्वतंत्र Gold Testing की सुविधा उपलब्ध कराने और BIS द्वारा HUID, Hallmark तथा Gold Testing Machines की निगरानी मजबूत करने की मांग की है। मशीनों की नियमित Calibration जांच पर भी जोर दिया गया है।
संगठन का कहना है कि सोने की शुद्धता जांचने वाली मशीनों की विश्वसनीयता सीधे ग्राहक के भरोसे से जुड़ी है। ऐसे में मशीनों की नियमित जांच और Calibration की व्यवस्था मजबूत होना जरूरी है।
एसोसिएशन ने ऐसे विज्ञापनों की भी जांच की मांग की है, जिनमें पुराने या स्थानीय ज्वेलर्स के सोने को लेकर नकारात्मक दावे किए जाते हैं। संगठन का कहना है कि यदि किसी कारोबारी या व्यापारिक वर्ग के बारे में व्यापक और तथ्यहीन धारणा बनाने वाले विज्ञापन प्रसारित किए जाते हैं तो उनकी जांच होनी चाहिए।
एसोसिएशन ने CCPA से ज्वेलरी क्षेत्र में बड़े विज्ञापनों और उपभोक्ताओं से किए जाने वाले व्यावसायिक दावों की आवश्यकतानुसार जांच कराने की मांग की है।
सराफा कारोबारियों ने मुद्दे को केवल व्यापारिक प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रखा है। एसोसिएशन ने पारंपरिक स्वर्ण कारीगरों और भारतीय स्वर्ण कला को संरक्षण देने के लिए ‘स्वर्ण कला बोर्ड/स्वर्णकार कल्याण बोर्ड’ गठित करने की मांग की है।
संगठन चाहता है कि ‘Made by Indian Karigar’ को राष्ट्रीय पहचान दिलाई जाए और पारंपरिक कारीगरों को सरकारी योजनाओं, कौशल विकास, आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण से जोड़ा जाए। एसोसिएशन के अनुसार, स्वर्ण आभूषण उद्योग केवल व्यापार नहीं बल्कि भारत की कला, संस्कृति और पीढ़ियों से चले आ रहे स्थानीय रोजगार का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ज्ञापन में गैर-राष्ट्रीयकृत बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा स्वर्ण आभूषणों के बदले दिए जाने वाले ऋण की प्रक्रिया पर भी निगरानी बढ़ाने की मांग की गई है। एसोसिएशन ने कहा है कि सोने के स्रोत और स्वामित्व की आवश्यक जांच तथा दस्तावेजों का सत्यापन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि संदिग्ध स्रोतों से प्राप्त सोना वित्तीय प्रक्रिया के माध्यम से बाजार में प्रवेश न कर सके।
एसोसिएशन ने देशभर में HUID, Hallmark, Gold Testing Machines, Calibration और उपभोक्ता संबंधी व्यावसायिक दावों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की है। साथ ही बिलासपुर के संबंधित प्रकरण में उच्चस्तरीय विशेषज्ञ टीम गठित कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
संगठन का कहना है कि यदि जांच में कोई दोष सामने आता है तो संबंधित संस्था या जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कमल सोनी ने ज्ञापन के माध्यम से स्पष्ट किया है कि संगठन किसी ब्रांड या प्रतिष्ठान के वैध व्यापार का विरोध नहीं करता। एसोसिएशन की मांग है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा हो, लेकिन वह समान नियम, पारदर्शी कीमत, विश्वसनीय शुद्धता जांच और उपभोक्ता को पूरी जानकारी के आधार पर हो।
ज्ञापन की प्रतिलिपि केंद्रीय गृह मंत्रालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री कार्यालय तथा भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) को भी भेजी गई है।
अब पूरे मामले में निगाह इस बात पर है कि सरकार और संबंधित नियामक एजेंसियां सराफा एसोसिएशन की शिकायतों और मांगों पर क्या कदम उठाती हैं। खासकर बिलासपुर के कथित HUID जांच प्रकरण की निष्पक्ष जांच होती है या नहीं, यह आने वाले दिनों में इस विवाद का सबसे अहम बिंदु रहेगा।


