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मटका बांधने चढ़ा था स्वागत गेट पर युवक, हाई वोल्टेज लाइन ने छीन ली 19 साल की जिंदगी; मातम में बदली खुशियां…

बिलासपुर। जन्माष्टमी की खुशियों के बीच जरहाभाठा के राजीव गांधी चौक में हुआ दर्दनाक हादसा अब बिजली विभाग और नगर निगम की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मटका बांधने के लिए स्वागत गेट पर चढ़ा 19 वर्षीय रेहान खान 11 केवी हाई वोल्टेज बिजली लाइन की चपेट में आ गया। करीब 60 प्रतिशत तक झुलसे रेहान ने दो दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद शनिवार तड़के करीब 4 बजे अस्पताल में दम तोड़ दिया। एक परिवार का चिराग बुझ गया, लेकिन पीछे व्यवस्था की वह लापरवाही छोड़ गया, जिस पर अब सवाल उठना लाजिमी है।

रेहान खान, पिता स्वर्गीय कल्ल खान, निवासी कुम्हारपारा, राजीव गांधी चौक जरहाभाठा, जन्माष्टमी पर्व की तैयारियों में जुटा था। बताया जा रहा है कि राजीव गांधी चौक के पास लगाए गए स्वागत गेट के ऊपर चढ़कर वह मटका बांधने की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान बेहद नजदीक से गुजर रही 11 केवी हाई वोल्टेज लाइन की चपेट में आ गया। करंट का झटका इतना भयावह था कि रेहान बुरी तरह झुलस गया और गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया।

दो दिनों तक चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज चलता रहा, लेकिन हालत लगातार गंभीर बनी रही। आखिरकार शनिवार सुबह उसकी सांसें थम गईं। महज 19 साल की उम्र में हुई इस मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। जिस जन्माष्टमी की तैयारियां परिवार और मोहल्ले में उत्साह का माहौल बना रही थीं, वही पर्व एक परिवार के लिए कभी न भूलने वाला मातम बन गया।

लेकिन इस हादसे को केवल एक युवक की दुर्घटना बताकर मामले को खत्म कर देना पर्याप्त नहीं होगा। बड़ा सवाल यह है कि जहां 11 केवी की हाई वोल्टेज लाइन इतनी कम ऊंचाई और दूरी पर गुजर रही हो, वहां उसके ठीक नीचे या बेहद करीब स्वागत गेट लगाने की अनुमति कैसे दी गई? क्या आयोजन से पहले बिजली के खतरनाक तारों और गेट की ऊंचाई के बीच सुरक्षित दूरी की जांच की गई थी? क्या नगर निगम, बिजली विभाग और आयोजनकर्ताओं के बीच कोई समन्वय था?

यह हादसा साफ संकेत दे रहा है कि शहर में धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के दौरान सजावट के नाम पर सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज करना कितना भारी पड़ सकता है। स्वागत गेट, झंडे, बैनर, लाइटिंग और मटके लगाने के लिए अक्सर लोग ऊंचे स्थानों पर चढ़ते हैं। ऐसे में बिजली की हाई वोल्टेज लाइनों के आसपास मामूली लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।

सबसे गंभीर बात यह है कि हाई वोल्टेज लाइन और स्वागत गेट के बीच सुरक्षित दूरी का सवाल पहले क्यों नहीं उठाया गया? यदि गेट और बिजली तारों के बीच दूरी वास्तव में बेहद कम थी, तो यह केवल आयोजनकर्ता की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल है।

अब नगर निगम और बिजली विभाग को इस हादसे से सबक लेना होगा। राजीव गांधी चौक समेत शहर के उन सभी स्थानों का तत्काल निरीक्षण होना चाहिए, जहां बिजली की हाई वोल्टेज लाइन के आसपास स्वागत गेट, होर्डिंग, मंच या अन्य अस्थायी ढांचे लगाए जाते हैं। जरूरत हो तो बिजली लाइन को सुरक्षित दूरी पर शिफ्ट किया जाए या स्वागत गेट की ऊंचाई कम की जाए। त्योहार हर साल आएंगे, आयोजन भी होते रहेंगे, लेकिन सुरक्षा से समझौता किसी और परिवार को रेहान की तरह अपना बेटा खोने पर मजबूर न करे।

घटना की सूचना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और हादसे की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। अब जांच केवल यह तय करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए कि हादसा कैसे हुआ, बल्कि यह भी तय होना चाहिए कि खतरनाक स्थिति बनने से पहले जिम्मेदार विभागों ने क्या सुरक्षा इंतजाम किए थे और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।

रेहान की मौत एक हादसा जरूर है, लेकिन इसे महज हादसा मानकर भूल जाना सबसे बड़ी गलती होगी। यह मौत शहर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है—बिजली के तारों और उत्सव की सजावट के बीच जरा-सी लापरवाही भी जिंदगी की कीमत वसूल सकती है।

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