बार-बार नोटिस, अनुबंध अवधि बढ़ाने और शपथ पत्र के बावजूद नहीं सुधरी काम की रफ्तार, बस्तर की सड़कों-पुलों में देरी पर सरकार का कड़ा एक्शन
बिलासपुर। जनता के पैसे से बनने वाली सड़कें और पुल अगर सालों तक अधूरे पड़े रहें तो इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है। बस्तर में निर्माण कार्यों की बेहद धीमी गति और काम पूरा करने में रुचि नहीं लेने वाले ठेकेदारों के खिलाफ अब लोक निर्माण विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने छह ठेकेदारों के पंजीयन का नवीनीकरण रोकते हुए उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की है, जबकि दो ठेकेदारों के पंजीयन निरस्त कर दिए गए हैं।
लोक निर्माण विभाग के मुताबिक संबंधित ठेकेदारों को काम में तेजी लाने के लिए बार-बार नोटिस जारी किए गए। अनुबंध की अवधि भी बढ़ाई गई। इतना ही नहीं, ठेकेदारों की ओर से काम पूरा करने को लेकर शपथ पत्र भी दिए गए, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्यों की रफ्तार में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। काम पूरा करने में लगातार उदासीनता सामने आने के बाद विभाग ने अब कार्रवाई का रास्ता अपनाया है।
राज्य शासन ने बस्तर में निर्माणाधीन महत्वपूर्ण सड़कों और पुलों की धीमी प्रगति की व्यापक समीक्षा के बाद यह कार्रवाई की है। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि जनहित से जुड़े निर्माण कार्यों में लापरवाही और अनुबंध की शर्तों की अनदेखी को अब सामान्य देरी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय ने ठेकेदार के. मोहन रेड्डी, मेसर्स शांति विजय कन्सट्रक्शन, मेसर्स ट्रांसाफ्ट इंफ्रा., मेसर्स राघवा कन्सट्रक्शन, मेसर्स बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेसर्स पंकज हालदार के खिलाफ पंजीयन के अ-नवीनीकरण के आदेश जारी किए हैं।
इनमें के. मोहन रेड्डी और मेसर्स ट्रांसाफ्ट इंफ्रा. के पंजीयन को निरस्त कर दिया गया है। दोनों के लिए आदेश दिनांक से आगामी पांच वर्षों तक पंजीयन के नवीनीकरण पर भी रोक लगाई गई है।
सुकमा जिले में चिंतलनार-मरियागुड़म मार्ग और कोंटा-गोलापल्ली मार्ग का निर्माण कर रहे मेसर्स राघवा कन्सट्रक्शन के पंजीयन को आगामी पांच वर्षों तक अ-नवीनीकरण की कार्रवाई की गई है। वहीं नारायणपुर जिले में नारायणपुर-सोनपुर-मरोड़ा मार्ग का निर्माण कर रहे मेसर्स शांति विजय कन्सट्रक्शन के पंजीयन के नवीनीकरण पर भी पांच वर्षों तक रोक लगा दी गई है।
चिंतलनार-मरियागुड़म मार्ग का निर्माण कर रहे मेसर्स ट्रांसाफ्ट इंफ्रा. का पंजीयन निरस्त करते हुए आदेश दिनांक से आगामी पांच वर्षों तक नवीनीकरण नहीं किया जाएगा।
सुकमा जिले में भेज्जी-चिंतागुफा मार्ग और चिंतलनार-मरियागुड़म सड़क का निर्माण कर रहे ठेकेदार के. मोहन रेड्डी का पंजीयन भी निरस्त कर दिया गया है। उनके पंजीयन के आगामी पांच वर्षों तक नवीनीकरण पर रोक रहेगी।
इसी तरह कोंटा-गोलापल्ली मार्ग का काम कर रहे मेसर्स बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर के पंजीयन के नवीनीकरण पर आगामी दो वर्षों तक रोक लगाई गई है। नारायणपुर-सोनपुर-मरोड़ा मार्ग पर पुल-पुलिया का निर्माण कर रहे मेसर्स पंकज हालदार के पंजीयन के नवीनीकरण पर भी पांच वर्षों तक रोक लगा दी गई है।
इस कार्रवाई का सबसे अहम पहलू यह है कि ठेकेदारों को पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद काम की स्थिति नहीं सुधरी। विभागीय स्तर पर नोटिस, समय बढ़ाने और ठेकेदारों के शपथ पत्र के बाद भी अगर निर्माण कार्य गति नहीं पकड़ता है तो ऐसी स्थिति में कार्रवाई से बचना मुश्किल है।
बस्तर में सड़कें और पुल केवल निर्माण परियोजनाएं नहीं हैं, बल्कि दूरदराज के इलाकों के लिए जीवनरेखा हैं। खराब सड़कें और अधूरे पुल लोगों की आवाजाही से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यापार और आपातकालीन सेवाओं तक को प्रभावित करते हैं। ऐसे में निर्माण कार्यों में अनावश्यक देरी को लेकर सरकार का सख्त होना अहम माना जा रहा है।
राज्य शासन ने इन कार्रवाईयों को लेकर बिलासपुर उच्च न्यायालय में कैविएट भी दायर की है। इससे साफ है कि सरकार ने कार्रवाई को लेकर संभावित कानूनी चुनौती के लिए भी अपनी तैयारी पूरी रखी है।
अब PWD की कार्रवाई के बाद बस्तर की इन निर्माणाधीन परियोजनाओं पर काम की रफ्तार बढ़ाने की चुनौती विभाग के सामने है। सरकार की कार्रवाई ने ठेकेदारों को सीधा संदेश दे दिया है कि जनता के पैसे से होने वाले निर्माण कार्यों में लापरवाही, लगातार देरी और अनुबंध की शर्तों की अनदेखी की कीमत सिर्फ नोटिस तक सीमित नहीं रहेगी।
काम नहीं तो ठेका नहीं—और लापरवाही जारी रही तो पंजीयन भी नहीं। बस्तर में PWD की कार्रवाई ने ठेकेदारों के लिए यही सख्त संदेश दिया है।


