क्राइमबिलासपुर

फर्जी बैंक खातों से साइबर ठगी का बड़ा खेल! सरकंडा पुलिस ने किया खुलासा, IDFC और SBI खातों के जरिए रकम ठिकाने लगाने के आरोप में, एक आरोपी गिरफ्तार…

बिलासपुर। न्यायधानी में साइबर ठगी के एक मामले में सरकंडा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बड़े वित्तीय धोखाधड़ी नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप में 33 वर्षीय नारायण साहू को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर कथित तौर पर आपराधिक षड्यंत्र रच रहा था और बैंक खातों के माध्यम से ठगी की रकम को इधर-उधर करने में उसकी भूमिका सामने आई है। आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश कर रिमांड पर लिया गया है। अब पुलिस इस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।

जांच में ‘साहू बिल्डिंग सप्लायर’ के नाम से संचालित IDFC FIRST BANK और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के खातों का इस्तेमाल सामने आया है। पुलिस के अनुसार, इन खातों के जरिए अवैध रूप से प्राप्त और ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर किया जा रहा था। जांच का अहम पहलू यह है कि इन खातों का संचालन कौन कर रहा था, रकम किन लोगों के खातों से आई और आगे किन खातों में भेजी गई।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर विभिन्न प्रलोभन देकर लोगों को निशाना बनाया और कथित तौर पर उनकी सहमति के बिना बैंक खातों से राशि का आहरण अथवा अंतरण किया। मामले में साइबर धोखाधड़ी के साथ आपराधिक षड्यंत्र की आशंका को देखते हुए पुलिस बैंक खातों से जुड़े लेन-देन और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान नारायण साहू, पिता तुलाराम साहू, उम्र 33 वर्ष, निवासी तेंदूपत्ता गोदाम के पास, गतौरी, थाना कोनी, जिला बिलासपुर के रूप में हुई है। आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2), 317(5), 318(4), 323, 3(5) तथा आईटी एक्ट की धारा 66-D के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इस कार्रवाई के बाद अब पुलिस के सामने इस कथित साइबर ठगी नेटवर्क की पूरी कड़ियां जोड़ने की चुनौती है। बैंक खातों के जरिए रकम कहां से आई, किसने उसे आगे ट्रांसफर किया और इस पूरे मामले में अन्य लोगों की क्या भूमिका रही, इसकी जांच की जा रही है। पुलिस अन्य संलिप्त आरोपियों की तलाश और साक्ष्य संकलन में जुटी है।

साइबर अपराध के मामलों में बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर पहुंचाने के लिए किया जाना जांच का महत्वपूर्ण पहलू होता है। ऐसे में इस मामले में बैंक लेन-देन की विस्तृत जांच से कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों और रकम के वास्तविक गंतव्य का खुलासा होने की उम्मीद है। हालांकि, ठगी की कुल रकम और पीड़ितों की संख्या के संबंध में अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। आरोपी के विरुद्ध लगे आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर होगा।

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