बिलासपुर

अरपा की रेत पर अवैध कारोबार करने वालों पर न्यायालय का करारा प्रहार, दोषी को 3 साल का कठोर कारावास और 26 हजार रुपये जुर्माना…

बिलासपुर, 28 अक्टूबर 2026। अरपा नदी की रेत का अवैध परिवहन करने वालों के लिए बिलासपुर से कड़ा संदेश सामने आया है। रेत के अवैध परिवहन के मामले में विशेष न्यायालय ने आरोपी को तीन साल के कठोर कारावास और कुल 26 हजार रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। इस फैसले ने साफ कर दिया है कि खनिज संपदा के अवैध कारोबार में कानून का उल्लंघन करने वालों को गंभीर कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर चलाए गए विशेष अभियान के तहत दर्ज इस प्रकरण में सजा सुनाया जाना प्रशासन की कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

खनिज शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 17 जून 2025 को ग्राम नगोई घाट स्थित अरपा नदी से ट्रैक्टर-ट्रॉली क्रमांक CG 10 BE 7869 में रेत का अवैध परिवहन करते पाए जाने पर कुंवर सिंह कंवर, पिता सम्मार सिंह, निवासी सल्का, थाना कोटा के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया था। कार्रवाई के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली को पुलिस चौकी बेलगहना की अभिरक्षा में रखा गया। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद विशेष न्यायाधीश, खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, जिला बिलासपुर ने 28 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाया।

न्यायालय ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) सहपठित धारा 3(5) के तहत तीन वर्ष के कठोर कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदण्ड की सजा सुनाई। वहीं, खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के प्रावधानों के तहत 25 हजार रुपये का अतिरिक्त अर्थदण्ड लगाया गया। इस तरह कुल 26 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

इस फैसले का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने विशेष अभियान शुरू किया था। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने 15 जून 2025 को संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 66 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इन मामलों में कोटा, रतनपुर, सीपत, सिविल लाइन, सरकंडा, मस्तूरी, पचपेड़ी, चकरभाठा और हिर्री थानों में कार्रवाई की गई।

66 प्रकरणों में से एक मामले में कठोर कारावास की सजा सुनाया जाना यह दर्शाता है कि अवैध खनिज परिवहन के मामलों में कार्रवाई का परिणाम न्यायालय तक पहुंच रहा है। हालांकि, शेष प्रकरणों की वर्तमान स्थिति और उनमें हुई कार्रवाई का विवरण सामने आना भी जरूरी है, ताकि अभियान की प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके।

रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन केवल नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं है, बल्कि इससे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, नदी के पर्यावरण और शासन के राजस्व पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में केवल वाहन जब्त करना और एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। अवैध उत्खनन के स्रोतों पर निगरानी, परिवहन की नियमित जांच और मामलों में प्रभावी पैरवी भी जरूरी है।

बिलासपुर में सुनाया गया यह फैसला अवैध रेत परिवहन में संलिप्त लोगों के लिए स्पष्ट चेतावनी है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि प्रशासन 66 प्रकरणों में आगे कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है और अरपा नदी सहित जिले के अन्य क्षेत्रों में खनिजों के अवैध दोहन पर कितनी स्थायी रोक लगा पाता है।

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