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प्रांत अध्यक्ष भगवत कश्यप के निलंबन पर भड़का पटवारी संघ, बिलासपुर में आदेश की प्रतियां जलाकर शासन के खिलाफ खोला मोर्चा…

13 अक्टूबर से जारी हड़ताल के बीच सरकार की कार्रवाई से पटवारियों में भारी आक्रोश, पदोन्नति और वेतन विसंगति की मांग पर आर-पार की लड़ाई के संकेत

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में पटवारियों की हड़ताल अब सरकार और राजस्व पटवारी संघ के बीच सीधे टकराव का रूप लेती नजर आ रही है। रायगढ़ में राजस्व पटवारी संघ के प्रांत अध्यक्ष भगवत कश्यप को निलंबित किए जाने के विरोध में बिलासपुर में पटवारियों का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा। आक्रोशित पटवारियों ने निलंबन आदेश की प्रतियां जलाकर शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और इस कार्रवाई को आंदोलन को दबाने की कोशिश बताया।

दरअसल, रायगढ़ में सरकारी कामकाज में लापरवाही और अधिकारियों के आदेशों की कथित अवहेलना के मामले में एसडीएम ने प्रांत अध्यक्ष भगवत कश्यप को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। बताया गया है कि विभागीय कारण बताओ नोटिस जारी होने के बावजूद जवाब प्रस्तुत नहीं करने को भी कार्रवाई का आधार बनाया गया। एसडीएम ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9 के तहत निलंबन आदेश जारी किया है।

लेकिन इस कार्रवाई ने पटवारी संघ के भीतर पहले से पनप रहे आक्रोश को और भड़का दिया है। बिलासपुर में पटवारी संघ ने निलंबन आदेश की प्रतियां जलाकर शासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। संघ का आरोप है कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने के बजाय दमनात्मक कार्रवाई कर आंदोलन को कमजोर करने में जुटी है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में राजस्व पटवारी संघ 13 अक्टूबर से हड़ताल पर है। संघ पदोन्नति और वेतन विसंगति सहित विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे पटवारियों का कहना है कि शासन उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय निलंबन और नोटिस जैसी कार्रवाई के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।

इधर, पटवारियों की हड़ताल से राजस्व विभाग का कामकाज प्रभावित हो रहा है। नामांतरण, सीमांकन, जमीन संबंधी प्रकरणों और अन्य जरूरी राजस्व कार्यों के लिए आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे लोगों के लिए यह हड़ताल लगातार मुसीबत बनती जा रही है।

अब सवाल यह है कि क्या सरकार पटवारियों की मांगों पर बातचीत का रास्ता अपनाएगी या फिर कार्रवाई और विरोध का यह सिलसिला और तेज होगा? प्रांत अध्यक्ष के निलंबन के बाद बिलासपुर में आदेश की प्रतियां जलाकर पटवारी संघ ने साफ संकेत दे दिया है कि वह पीछे हटने के मूड में नहीं है। दूसरी ओर प्रशासन की सख्ती भी जारी रही तो प्रदेश में यह टकराव और गहरा सकता है।

आंदोलन और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ रहा है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि शासन और पटवारी संघ आमने-सामने की लड़ाई छोड़कर बातचीत की मेज पर आएं, ताकि कर्मचारियों की मांगों का समाधान भी हो और आम लोगों के राजस्व संबंधी काम भी प्रभावित न हों।

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