Thursday, March 12, 2026
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लोकसभा चुनाव 2019: भारत में एग्जिट पोल्स, कब निकले चुनाव के सटीक नतीजे और कब हुए ध्वस्त…विश्वसनीय होते हैं एग्जिट पोल?

एग्जिट पोल कितने सटीक और विश्वसनीय होते हैं, इसको लेकर हर चुनाव में सवाल उठते रहे हैं। इस बार भी उठ रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय का कहना है कि सिर्फ कुछ लोगों के मत के आधार पर ही सटीक अनुमान कैसे लगाया जा सकता है कि किस पार्टी को कितनी सीटें आ रही हैं? वोट डालने के बाद सामान्य मतदाता यह क्यों बताएगा कि उसने किस पार्टी को वोट दिया है? एग्जिट पोल सिर्फ एक संकेत भर है। इसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1980 से लेकर अब तक के एग्जिट पोल सही साबित नहीं हुए। वर्ष 2014 में सिर्फ चाणक्य का एग्जिट पोल ही चुनाव परिणामों के काफी करीब रहा है। एग्जिट पोल अब व्यवसाय हो गया है।

इसमें राजनीतिक दलों ने अब हस्तक्षेप करना भी शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि भारत में वर्ष 1980 के चुनाव से एग्जिट पोल शुरू हुआ। इंडिया टुडे ने बताया था कि इंदिरा गांधी की कांग्रेस को 300 सीटें आ रही हैं। कुछ मीडिया संस्थानों का कहना था कि बाबू जगजीवन राम के नेतृत्व में जनता पार्टी को 300 सीटें मिल रही हैं, लेकिन चुनाव परिणाम में कांग्रेस को 353 और जनता पार्टी को सिर्फ 31 सीटें मिलीं। एग्जिट पोल के जन्मदाता इंग्लैंड के चुनाव विश्लेषक डेविड बटलर रहे हैं। बटलर 1945 से चुनाव के पूर्वानुमान लगाते रहे हैं।

यह भी पढ़ें…लोकसभा चुनाव 2019: कैसे होते है एक्जिट पोल और पोस्ट पोल सर्वे…जाने क्या है सैंपल लेने की प्रक्रिया…

उल्लेखनीय है कि वर्ष 1996 के लोकसभा चुनाव के दौरान दूरदर्शन ने सीएसडीएस को देशभर में एग्जिट पोल की अनुमति दे दी। सीएसडीएस के एग्जिट पोल में किसी भी दल को बहुमत मिलता नहीं दिखा था। इस चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत हासिल नहीं कर पायी थी। वर्ष 1998 के लोकसभा चुनाव में हुए एग्जिट पोल ज्यादातर समाचार चैनलों में प्रसारित हुए। इस चुनाव में चुनावी सर्वे करने वाली प्रमुख एजेंसियां; जैसे- इंडिया टुडे, सीएसडीएस, डीआरएस, एसी निल्सन और फ्रंटलाइन/सीएमएस अपने सर्वे में भाजपा-नीत राजग को बड़़ी पार्टी के रूप में दर्शाते हुए बहुमत से दूर रखा था, लेकिन चुनाव परिणामों में राजग को बहुमत मिला।

अन्य देशों में क्या है स्थिति

एग्जिट पोल बेल्जियम, डेनमार्क, जर्मनी और आयरलैंड जैसे देशों में एग्जिट पोल करने को खुली छूट है, जबकि चीन, दक्षिण कोरिया और मैक्सिको में कुछ शर्तों के साथ एग्जिट पोल की इजाजत है। यूनाइटेड किंगडम में ओपिनियन पोल को लेकर कोई पाबंदी नहीं है। लेकिन एग्जिट पोल तब तक जारी नहीं किए जा सकते, जब तक वोटिंग पूरी नहीं हो जाती। जर्मनी में एग्जिट पोल तब तक नहीं रिलीज किए जा सकते जब तक सभी पोलिंग स्टेशन बंद नहीं हो जाते। बुल्गारिया में एग्जिट पोल की घोषणा गैर-कानूनी है। सिंगापुर में एग्जिट पोल पूरी तरह से प्रतिबंधित है।

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