Saturday, August 30, 2025
Homeदेशअगर ऐसे अपमान होगा, तो कोई भी जज नहीं बनना चाहेगा :...

अगर ऐसे अपमान होगा, तो कोई भी जज नहीं बनना चाहेगा : चीफ जस्टिस रंजन गोगोई…जानें आरोप लगने वाली महिला और पति के बारे में…

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर एक महिला द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोपों की सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस ने ऐसे आरोप पर नाराजगी जताते कहा कि अगर ऐसे आरोप लगेंगे तो कौन समझदार जज बनना चाहेगा? न्यायिक व्यवस्था पर खतरे की बात कहते हुए वहां सीजेआई ने कहा, ‘न्यायतंत्र की स्वतंत्रता खतरे में है। अगर जजों को ऐसे अपमानित किया जाएगा तो कोई अच्छा शख्स जज क्यों बनना पसंद करेगा? कौन जज बनना चाहेगा और सिर्फ 6.8 लाख रुपये के बैंक बैलेंस के साथ रिटायर होना चाहेगा?’

अपनी सफाई में रंजन गोगोई ने यह भी कहा कि उनके ऊपर ऐसे आरोप इसलिए लगाए जा रहे हैं क्योंकि अगले हफ्ते उन्हें कुछ अहम केसों की सुनवाई करनी है। इसमें राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का केस, पीएम मोदी पर बनी फिल्म पर लगी रोक पर सुनवाई जैसे मामले शामिल हैं। गोगोई ने साफ किया कि वह अपने 7 महीने के बचे कार्यकाल में बचे सभी की सुनवाई करेंगे और उन्हें ऐसा करने से कोई नहीं रोक सकता।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि जज को इस तरह की स्थिति में काम करना पड़ेगा तो कोई भी समझदार व्यक्ति यहां काम करने नहीं आएगा। मैं उस कमिटी का हिस्सा नहीं बनूंगा जो कमिटी महिला के आरोपों की जांच करेगी। इस मामले में हमारे सहयोगी जज मामले को एग्जामिन करेंगे। मुझे मौजूदा बेंच का गठन करना पड़ा क्योंकि ये मेरी जिम्मेदारी है और ये असाधारण कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरे में है। महिला का ये आरोप अकल्पनीय है। मैं समझता हूं कि ये उचित नहीं होगा कि आरोप का जवाब भी दूं क्योंकि ये भी आपको नीचे ले जाता है। कुछ ताकतें इसके पीछे हैं जो चीफ जस्टिस के दफ्तर को निष्क्रिय करना चाहती हैं।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया और कहा कि अनाप शनाप चीजें छापी जा रही हैं। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि मैं कोर्ट का ऑफिसर हूं लेकिन मैं सरकार के बचाव के कारण हमले का शिकार होता हूं। पहले दो केस ऐसे हुए जिसमें एक मामला पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज के खिलाफ था और दूसरा वकील के खिलाफ तब मीडिया से कहा गया था कि वह कुछ भी प्रकाशित न करे।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ये ब्लैकमेलिंग टेक्टिस लग रहा है। मामले में महिला के खिलाफ जांच होनी चाहिए। इस तरह की अनाप शनाप बातें प्रकाशित की गईं। जस्टिस मिश्रा ने कहा कि चिंता जूडिशियरी की स्वतंत्रता को लेकर है। लोगों का जूडिशियरी में विश्वास है। वहीं जस्टिस खन्ना ने कहा कि जज केस में फैसला लेते हैं लेकिन उन्हें इस तरह के तनाव में नहीं रखा जा सकता। एक पूर्व कर्मी को प्रक्रिया के तहत नौकरी से हटाया जाता है और एकाएक वह एक दिन जगती है और इस तरह का आरोप लगाती है।

आरोप लगानेवाली महिला के बारे में चीफ जस्टिस ने कहा कि महिला का पति दिल्ली पुलिस में है और उसे एक क्रिमिनल केस की वजह से सस्पेंड तक किया गया था। साथ ही महिला को भी एक दिन की कस्टडी में रहना पड़ा था। चीफ जस्टिस ने बताया कि वह महिला उनके दफ्तर में 27 अगस्त से 22 अक्टूबर तक काम कर रही थी। महिला ने अपनी शिकायत में 11 अक्टूबर का जिक्र किया है। वहीं चीफ जस्टिस के मुताबिक, उन्होंने खुद अपने प्रधान सचिव के जरिए 12 और 13 अक्टूबर को सेक्रेटरी जनरल को महिला के गलत व्यवहार के बारे में जानकारी देते हुए लिखित शिकायत दी थी।

गोगोई ने आगे कहा, ‘महिला का पति लगातार मुझे फोन करके उसकी पत्नी को वापस काम पर रखने के लिए गुजारिश करता रहता था। वह अपना सस्पेंशन हटवाने में भी मेरी मदद चाहता था। उस महिला का क्रिमिनल रिकॉर्ड है। 2011 में उसपर दो एफआईआर दर्ज हुई थी। पहले केस में उसे क्लीन चिट मिल गई थी वहीं दूसरे में उसे पुलिस ने चेतावनी देकर छोड़ दिया था और कहा था कि वह अपने व्यवहार को सुधारे।’ चीफ जस्टिस ने यहां एक अन्य मामले का भी जिक्र किया जिसमें महिला पर सुप्रीम कोर्ट में नौकरी लगवाने के बदले 50 हजार रुपये मांगने का आरोप है।

spot_img

AD

spot_img

advertisement

spot_img
RELATED ARTICLES

Recent posts

error: Content is protected !!
Latest