बिलासपुर

होराइजन कोलवाशरी की जन सुनवाई निरस्त करने ग्रामीणों ने किया कलेक्ट्रेट का घेराव…SDM बोले नही है संतुष्ट तो जा सकते हैं कोर्ट…

एसडीएम तुलाराम भारद्वाज भी कलेक्ट्रेट पहुंचे और ग्रामीणों से बात की, ग्रामीणों ने आरोप लगाया की सरकार, शासन, प्रशासन सब की...

बिलासपुर। 28 सितम्बर को होने जा रही होराइजन कोलवाशरी की जन सुनवाई निरस्त करने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में महिला, स्कूली बच्चे और ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर दिया और कलेक्टर से मिल कर ज्ञापन देने की बात कहते हुए घंटो गेट के सामने बैठे रहे।

जानकारी प्राप्त होते ही एसडीएम तुलाराम भारद्वाज भी कलेक्ट्रेट पहुंचे और ग्रामीणों से बात की, ग्रामीणों ने आरोप लगाया की सरकार, शासन, प्रशासन सब की मिली भगत से सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन और केंद्र सरकार के नियमों का उलंघन करके जनसुनवाई करवाई जा रही है। इस पर एसडीएम भारद्वाज ने ग्रामीणों से साफ कहा की प्रशासन के काम से आप लोग संतुष्ट नहीं हैं तो हाईकोर्ट जा सकते हैं कोर्ट का दरवाजा सब के लिए खुला है।

यदि सारे नियमों और शर्तों को तांक में रखकर के होराइजन कोलवाशरी की जन सुनवाई कराई जाती है। तब की परिस्थिती में क्षेत्र के सारे जन प्रतिनिधि ग्रामीण जनों को लेकर उग्र आंदोलन किया जाएगा एवं न्याय पालिका में जनहित को देखते हुए पीआईएल लगाई जाएगी, इसकी सारी जवाब देही क्षेत्रीय शासन ,प्रसाशन की होगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार भारत सरकार की उद्योग नीति के अनुरूप आवेदन तिथि से पैतालींस दिन के भीतर में जन सुनवाई करवानी होती है। इसके बाद की तिथि में कराई जन सुनवाई विधि संगत नहीं है। अतः होराइजन कोलवाशरी द्वारा 15.07.2022 को आवेदन किया गया था। जिसकी जन सुनवाई 28.09.2022 को कराई जा रही है। आवेदन तिथि से 66 दिन बाद जन सुनवाई करायी जाएगी। उन्होंने निवेदन किया की इस आवैधानिक जन सुनवाई को तत्काल निरस्त किया जाए।

कोर्ट जानें की बात को लेकर ग्रामीण नाराज…देखे वीडियो

बिंदुबार अपनी आपत्ति उल्लेख भी किया है

1. भारत सरकार उद्योग नीति के नियमानुसार दूसरे जिले की सीमा से 10 किमी के अंदर आती है। जो जन सुनवाई दो दिवस में करायी जानी चाहिए। परन्तु बिलासपुर जिले की सीमा से महज 3 किमी. दूरी पर जांजगीर चांपा जिला लग जाता है। इसके बावजूद भी जन सुनवाई को एक जिले बिलासपुर में कराया जा रहा है। वो भी एक ही दिन 28 सितंबर को जनसुनवाई होने जा रही है। जांजगीर जिले में जन सुनवाई नहीं करायी जा रहीं है।

2. क्या ये रिपोर्ट में सर्वेक्षण वहां पर कितने वृद्ध, कितने व्यस्क एवं कितने बच्चे है। इसका उल्लेख नहीं है जमीन के प्रकारों का उल्लेख नहीं फसलों का उल्लेख नहीं है होराइजन कोलवाशरी के द्वारा जिस कन्सटेन्सन कम्पनी के द्वारा रिपोर्ट बनवायी गयी है उसमें पंचनामा नहीं हैं जबकि सत्यापित पंचनामा की छाया प्रति रिपोर्ट में होनी चाहिए।

3. जिस ग्राम पंचायत में होराइजन कोलवाशरी खोली जा रही है। उस पंचायत की अनापत्ति प्रमाण पत्र संलग्न होनी चाहिए पर ग्राम पंचायत की अनापत्ति प्रमाण पत्र। पर्यावरण अधिकारी के द्वारा ग्राम पंचायत की अनापत्ति को दर किनार कर जन सुनवाई करा रहे हैं जो विधि संगत नहीं है। संलग्न नही

4. बिलासपुर जिले के जितने भी उद्योग या कोलवाशरी खोली गयी है। इसमें प्रधानमंत्री सड़क योजना का इस्तेमाल किया जा रहा है । जबकि प्रधानमंत्री सड़क योजना की क्षमता छः से बारह टन की होती है। वहीं कोलवाशरी या उद्योग के खोले जाने से सड़क पर चालीस ( 40 ) से साठ ( 60 ) टन का अधिक भार पड़ता है। जिससे सड़क समूल नष्ट हो जाती है। जिसके कारण जान – माल की हानि होती है। किसी भी उद्योग पास प्रधानमंत्री सड़क योजना विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं है।

5. जल संसाधन विभाग के द्वारा जन आपूर्ति के लिए जल दोहन क्षमता की अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है। और कोलवाशरी को यह भी बताना होता है कि पानी की आपूर्ति कोयले को वास करने के लिए कहां से करेंगें। भू जल स्तर का लगातार उपयोग किये जाने के कारण जिस क्षेत्र में कोलवाशरी स्थापित है उस क्षेत्र का भू जल स्तर घटता है। जिससे आस – पास पेय जल संकट , कृषि संकट गहराता है।

6. ग्राम पंचायत भनेसर में स्थित बहुत पुराना मिशन स्कूल हायर सेकेन्ड्री स्कूल संचालित है। इस रिपोर्ट में स्कूल का उल्लेख नहीं है। जिसको देखकर के लगता है ये रिपोर्ट कनसन्टेंट कंपनी में एक कमरे में बैठकर बनायी है चूंकि किसी उद्योग या कोलवाशरी के खुलने से उस क्षेत्र के पर्यावरण प्रदुषण की क्षमता बहुत बढ़ जाती है। पर छत्तीसगढ़ में पर्यावरण विभाग इसको लेकर गंभीर नहीं है। एक बड़े जन समुदाय के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहा है। गंभीर बिमारिया उस क्षेत्र के ग्रामीणों को होगी जैसे- चर्म रोग, कैंसर, बांझपन, नंपुसकता, कमजोरी दृष्टि, कुपोषण इसको लेकर विभाग गंभीर नहीं है।

7. क्षेत्र के ग्रामीण एवं जन प्रतिनिधियों की अनदेखी करते हुए सुनवाई कराना अनुचित है।

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