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युवाओं के भविष्य पर सड़कों पर छिड़ी जंग, पेपर लीक के खिलाफ एनएसयूआई का उग्र प्रदर्शन; पुलिस से टकराव में घायल हुए नेता, गिरफ्तारी के बाद भी जारी रहा विरोध…

बिलासपुर। नीट, सीबीएसई, एसएससी और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और भ्रष्टाचार के विरोध में शुरू हुआ एनएसयूआई का आंदोलन बुधवार को बिलासपुर में बड़े राजनीतिक टकराव में बदल गया। हजारों युवाओं का आक्रोश, केंद्रीय मंत्री के आवास का घेराव, पुलिस की बैरिकेडिंग, वाटर कैनन, उपमुख्यमंत्री निवास तक मार्च, लाठीचार्ज, घायल विधायक और गिरफ्तारियां—इन सबने शहर को पूरे दिन राजनीतिक उबाल में बनाए रखा।

राष्ट्रीय एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ की अगुवाई में निकला यह प्रदर्शन केवल एक छात्र आंदोलन नहीं रहा, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ कांग्रेस के व्यापक राजनीतिक प्रतिरोध का मंच बन गया। नेहरू चौक में आयोजित सभा में कांग्रेस और एनएसयूआई नेताओं ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा किया। मंच से एक स्वर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठी।

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा घोटालों ने देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को गहरा आघात पहुंचाया है। करोड़ों विद्यार्थी वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षाओं में बैठते हैं, लेकिन यदि प्रश्नपत्र पहले ही बाजार में बिकने लगें तो प्रतिभा, परिश्रम और ईमानदारी का कोई अर्थ नहीं रह जाता। यही भावना बुधवार को सड़कों पर दिखाई भी दी।

सभा समाप्त होते ही हजारों कार्यकर्ता केंद्रीय मंत्री के आवास की ओर बढ़े। प्रशासन पहले से अलर्ट था और पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। जगह-जगह बैरिकेड्स लगाए गए थे, लेकिन प्रदर्शनकारी उन्हें पार करने का लगातार प्रयास करते रहे। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने दो चरणों में वाटर कैनन का प्रयोग किया। पानी की तेज धार से कई कार्यकर्ता और नेता बैरिकेड्स से नीचे गिर पड़े, लेकिन आंदोलन का तेवर कम नहीं हुआ।

केंद्रीय मंत्री के आवास के बाहर लंबे गतिरोध के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपना रुख उपमुख्यमंत्री अरुण साव के निवास की ओर कर लिया। यहीं से घटनाक्रम ने सबसे ज्यादा तनावपूर्ण मोड़ लिया। पुलिस ने रास्ते में घेराबंदी कर सांकेतिक गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू की, लेकिन नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया। देखते ही देखते धक्का-मुक्की बढ़ी और हालात नियंत्रण से बाहर जाते नजर आए।

इसके बाद जो दृश्य सामने आए, उन्होंने शहर की राजनीति को झकझोर दिया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई, बल प्रयोग किया गया और कई जगह लाठीचार्ज जैसे हालात बन गए। वायरल हो रहे वीडियो में पुलिस जवान प्रदर्शनकारियों को खदेड़ते और लाठियां चलाते दिखाई दे रहे हैं, जबकि कार्यकर्ता इधर-उधर भागते नजर आ रहे हैं।

इस झड़प में वैशाली नगर विधायक देवेंद्र यादव घायल हो गए। उनके जबड़े में चोट लगने की जानकारी सामने आई है। युवा कांग्रेस नेता लकी मिश्रा सहित कई अन्य कार्यकर्ताओं के भी घायल होने की खबर है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि पुलिस ने केवल भीड़ नियंत्रित करने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया।

बुधवार का यह घटनाक्रम प्रदेश की राजनीति के एक पुराने अध्याय को भी फिर से चर्चा में ले आया। करीब छह-सात वर्ष पहले कांग्रेस भवन के सामने हुए चर्चित लाठीचार्ज की यादें एक बार फिर ताजा हो गईं। उस समय भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने बल प्रयोग किया था और कई वरिष्ठ नेता घायल हुए थे। राजनीतिक गलियारों में बुधवार की घटना की तुलना उसी प्रकरण से की जा रही है।

आंदोलन के अंत में पुलिस ने राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़, प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडे सहित कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर कोनी थाना भेज दिया। गिरफ्तारी के दौरान भी प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठकर नारेबाजी करते रहे और केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराते रहे।

बिलासपुर में बुधवार को जो कुछ हुआ, उसने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर परीक्षा घोटालों और पेपर लीक के मामलों पर युवाओं का भरोसा कैसे बहाल होगा। दूसरी ओर, पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज के आरोपों ने सरकार को भी विपक्ष के निशाने पर ला खड़ा किया है।

स्पष्ट है कि पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन अब केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। यह मुद्दा राजनीतिक संघर्ष का बड़ा प्रतीक बन चुका है और आने वाले दिनों में इसकी गूंज प्रदेश की राजनीति में और तेज सुनाई दे सकती है।

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