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हमेशा विवादों में रहने वाला ड्रीमलैंड हायर सेकंडरी स्कूल का नया कारनामा, आरटीई के तहत पढ़ रहे बच्चों पर फीस जमा करने का दबाव…

बिलासपुर। बिलासपुर जिले में एक स्कूल की मनमानी सामने आई है। आरोप है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत दाखिला पाए बच्चों पर संचालक फीस जमा करने का दबाव बना रहे हैं। अभिभावक ने बच्चे के साथ कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर और डीईओ से राहत दिलाने की गुहार लगाई है।

अभिभावक ने बताया कि बंधवापारा सरकंडा स्थित ड्रीमलैंड हायर सेकंडरी स्कूल में आरटीई के तहत पढ़ता है। कुछ साल तक शासन की योजना के तहत पढ़ाई करने के बाद अब स्कूल प्रबंधन का रवैया बदल गया है। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन आगे की पढ़ाई कराने की एवज में फीस की डिमांड कर रहा है।

पालक का कहना है कि प्राचार्य ने पहले बच्चे से कहा कि आगे की पढ़ाई करनी है तो अपने अभिभावक से फीस जमा कराओ। कुछ दिन बाद तक फीस जमा नहीं हुई तो प्राचार्य ने बच्चे के पालक को स्कूल बुलवाया और दो टूक शब्दों में कहा कि आपके बच्चे का नाम आरटीई से हटाया जा रहा है, आगे की पढ़ाई करानी है तो नकद फीस देनी होगी। बच्चे के पिता गरीबी का हवाला देते हुए फीस जमा नहीं कर पाने की गुहार लगाता रहा, उन्होंने कहा कि अगर उनकी हैसियत होती तो वे आरटीई के तहत क्यों पढ़ाई कराते। लेकिन प्राचार्य ने उनकी एक न सुनी। उन्हें स्कूल से यह कहते हुए चलता कर दिया कि जून में बच्चे को स्कूल में तभी घुसने दिया जाएगा, जब फीस जमा हो जाएगी।

गड़बड़ी पर नए सत्र में प्रवेश पर लगी है रोक
ड्रीमलैंड स्कूल का विवादों से पुराना नाता रहा है। कुछ साल पहले स्कूल में मनमानी फीस, सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा और स्कूल शिक्षा विभाग के नियम का पालन नहीं करने के आरोप के साथ शिकायत की गई थी। डीईओ ने पूरे मामले की जांच कराई। जांच टीम ने स्कूल से दस्तावेज जमा करने कई बार समय दिया, लेकिन प्रबंधन ने दस्तावेज ही जमा नहीं कराया। इसलिए डीईओ ने नए सत्र 2024-25 में स्कूल में प्रवेश पर बैन लगा दिया है। यही वजह है कि प्रबंधन अब आरटीई के तहत पढ़ रहे बच्चों से फीस की भरपाई कराना चाहता है।

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