बिलासपुर

53 एकड़ चारागाह की जमीन पर अवैध कब्जा: ग्रामीण ने दिया, मेनरोड पर चक्का जाम करने की चेतावनी…

Illegal occupation of 53 acres of pasture land: Villager threatens to block the main road...

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में किसानों को पिछले कुछ समय से गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यहां के किसान, जिनकी आजीविका मुख्य रूप से पशुपालन पर निर्भर है, एक बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं। चारागाह, जो कि वर्षों से गांव के मवेशियों के लिए चरागाह का काम करता आ रहा था, पर अब अवैध कब्जा कर लिया गया है। इस चारागाह का क्षेत्र 53 एकड़ से भी अधिक है और इसे महाल नंबर दो के नाम से जाना जाता है। पूर्वजों ने इसे पोड़ी और चोरभट्ठी के निवासियों के मवेशियों के चारे के लिए छोड़ा था।

हालांकि, पिछले वर्ष से इस जमीन पर चोरभट्ठी के निवासियों द्वारा कब्जा कर लिया गया है। उन्होंने पूरे चारागाह क्षेत्र को खंबा फैसिंग तार से घेर लिया है, जिससे पोड़ी के निवासियों के मवेशियों को चरने की जगह नहीं मिल रही है। जो मवेशी वहां जाने की कोशिश करते हैं, उन्हें डंडे से मारकर घायल कर दिया जाता है। इस स्थिति ने गांव के पशुपालकों को असमंजस में डाल दिया है। वे पिछले 20 दिनों से अपने मवेशियों को घर में बंद रखने को मजबूर हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई मवेशी बीमार होकर मर रहे हैं।

किसानों ने प्रशासन से कई बार इस समस्या के समाधान के लिए निवेदन किया है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यह लापरवाही और असंवेदनशीलता की स्थिति है, जो कि किसानों के लिए असहनीय हो गई है। किसान अब यह मांग कर रहे हैं कि गुरुवार, 5 सितंबर 2024 तक इस मामले में कार्रवाई की जाए और चारागाह को कब्जाधारियों से मुक्त कराया जाए।

किसानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस तिथि तक प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वे मजबूरन 6 सितंबर 2024 को सीसल फार्म चौक, कोटा मेनरोड पर चक्काजाम करेंगे। यह किसानों के लिए एक अंतिम विकल्प है, क्योंकि उन्हें अपने मवेशियों की जान बचाने के लिए कोई अन्य रास्ता नहीं दिख रहा है।

यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि किस प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की समस्याओं को अनदेखा किया जा रहा है। यदि समय पर प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है, जिससे न केवल किसानों का जीवन प्रभावित होगा, बल्कि ग्रामीण इलाकों में अशांति का माहौल भी पैदा हो सकता है।

सरकार और स्थानीय प्रशासन से अपील है कि वे किसानों की इस गंभीर समस्या का समाधान करने के लिए तत्परता से कार्य करें, ताकि मवेशियों को चरागाह मिल सके और किसानों का जीवन सामान्य हो सके। अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्थिति और बिगड़ सकती है, जिसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ेगा।

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