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24,800 शिक्षार्थियों के सपनों को मिली नई उड़ान, मुक्त विश्वविद्यालय के सप्तम दीक्षांत समारोह में राज्यपाल रमेन डेका ने दिया सफलता का मंत्र…

बिलासपुर। पंडित सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर का सप्तम दीक्षांत समारोह मंगलवार को विश्वविद्यालय परिसर में गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ। समारोह में शिक्षा, उपलब्धि और सामाजिक सरोकारों का अनूठा संगम देखने को मिला। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति रमेन डेका की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में विभिन्न शैक्षणिक सत्रों के कुल 24,800 सफल शिक्षार्थियों को उपाधि एवं प्रमाणपत्र प्रदान करने की घोषणा की गई। वहीं शिक्षा, प्रबंधन और भूगोल विषय के पांच शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

समारोह में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव, विधायक धरमलाल कौशिक एवं सुशांत शुक्ला, महापौर पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी सहित उच्च शिक्षा जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा, राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के अध्यक्ष प्रो. नागेश्वर राव तथा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वीरेंद्र कुमार सारस्वत सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं शिक्षाविद भी शामिल हुए।

कुलपति प्रो. वी.के. सारस्वत ने विश्वविद्यालय का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि पंडित सुन्दरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय प्रदेश के ग्रामीण, जनजातीय, दूरस्थ और कामकाजी वर्ग के शिक्षार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन किया जा चुका है। विद्यार्थियों को केवल डिग्री तक सीमित रखने के बजाय उन्हें कौशल, रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के उद्देश्य से 32 डिप्लोमा तथा 68 प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम अनुमोदित किए गए हैं।

विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं उभरती तकनीकों के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना तथा शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पंडित सुन्दरलाल शर्मा शोध पीठ की शुरुआत को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य है कि आर्थिक, सामाजिक अथवा भौगोलिक परिस्थितियां किसी भी व्यक्ति की शिक्षा में बाधा न बनें। गांव, वनांचल, जनजातीय क्षेत्र, महिलाएं, युवा और कामकाजी लोग भी उच्च शिक्षा के अवसरों से जुड़ सकें।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने उपाधि और स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि अपने ज्ञान और कौशल से समाज के उत्थान में योगदान देना है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सुधारक पंडित सुंदरलाल शर्मा के नाम पर स्थापित यह विश्वविद्यालय उन लोगों के सपनों को साकार कर रहा है, जो कामकाज अथवा अन्य परिस्थितियों के कारण नियमित शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते। उन्होंने विश्वविद्यालय को नैक की ए प्लस ग्रेडिंग मिलने पर बधाई दी। युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में असफलता से निराश होने के बजाय उसे चुनौती के रूप में स्वीकार करना चाहिए। निरंतर प्रयास और आत्मविश्वास ही सफलता की असली कुंजी हैं।

दीक्षांत वक्ता प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि गुरुजनों से अर्जित ज्ञान और संस्कारों को लेकर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में नई जिम्मेदारियां निभाने की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य स्वाभिमानी, क्षमतावान और चरित्रवान युवा तैयार करना है, जिनकी जड़ें भारतीय संस्कृति और विचारधारा से जुड़ी हों। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी बोली, भाषा और पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर कभी संकोच नहीं करने की अपील की। अपनी भाषा, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के साथ आत्मगौरव से जीवन जीने का संदेश देते हुए उन्होंने युवाओं से जीवनपर्यंत सीखने की प्रवृत्ति विकसित करने का आह्वान किया।

दीक्षांत अतिथि एवं नैक अध्यक्ष प्रो. नागेश्वर राव ने भी उपाधि और स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा की वास्तविक उपयोगिता जीवन के प्रत्येक मोड़ पर सामने आती है। शिक्षा व्यक्ति को केवल ज्ञानवान नहीं बनाती, बल्कि उसके भीतर आत्मसम्मान, क्षमता और चरित्र का विकास भी करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी भाषा, संस्कृति और पारिवारिक पृष्ठभूमि पर गर्व करने तथा भारतीय मानवीय मूल्यों को अपनाकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे राज्यपाल एवं कुलाधिपति रमेन डेका ने अपने संबोधन में कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन में नई ऊर्जा, नई जिम्मेदारियों और नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। मुक्त विश्वविद्यालय दूरस्थ क्षेत्रों तक ज्ञान पहुंचाने और उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इंटरनेट और डिजिटल तकनीक ने शिक्षा को पहले की तुलना में अधिक सुलभ बनाया है, लेकिन युवाओं को इन संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि युवाओं को दूसरों की नकल और तुलना करने के बजाय अपनी विशिष्ट प्रतिभा पर विश्वास करना चाहिए। जीवन में अपना स्थान स्वयं बनाना पड़ता है। असफलता से घबराने के बजाय उसकी वजह समझकर गलतियों से सीखना और दोबारा प्रयास करना चाहिए। शिक्षा का उपयोग केवल नौकरी और व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए भी होना चाहिए।

उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि बच्चों पर अपनी अपेक्षाएं थोपने के बजाय उनकी रुचि और प्रतिभा को समझें तथा उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दें। राज्यपाल ने डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग से बचने, समय का सदुपयोग करने और जीवन में आंतरिक संतुष्टि एवं संतुलन बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वच्छता, पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण जैसे छोटे-छोटे प्रयास भी समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में ऐसा कार्य जरूर करना चाहिए, जिसका उद्देश्य केवल लेन-देन नहीं, बल्कि सकारात्मक सामाजिक बदलाव हो।

समारोह में सामाजिक योगदान के लिए पंडित सुन्दरलाल शर्मा वनवासी गौरव सम्मान पुरुषोत्तम लाल उरांव और दामोदर कश्यप को प्रदान किया गया। पुरुषोत्तम लाल उरांव को जनजातीय बच्चों की शिक्षा एवं सर्वांगीण विकास के लिए, जबकि दामोदर कश्यप को बस्तर क्षेत्र में सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से वन एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए सम्मानित किया गया।

इसी तरह पंडित सुन्दरलाल शर्मा संस्कृति रत्न सम्मान लोकगायिका पद्मश्री डॉ. उषा बारले तथा रामनामी परंपरा के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली गुरुमाता सेतबाई रामनामी और गुलाराम रामनामी को प्रदान किया गया। इन सम्मानों के माध्यम से विश्वविद्यालय ने शिक्षा के साथ जनजातीय विरासत, लोककला, पर्यावरण और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण में जुटे लोगों के योगदान को प्रतिष्ठित किया।

विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का स्नातक स्तर पर क्रियान्वयन प्रमुख रहा। इसके अलावा 12 नए ऑनलाइन पाठ्यक्रमों तथा एमएससी वनस्पति विज्ञान एवं एमएससी प्राणी विज्ञान के संचालन की स्वीकृति प्राप्त हुई है। रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए 32 कौशल आधारित डिप्लोमा एवं 68 प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों को अनुमोदित किया गया है।

विद्यार्थियों की सुविधा के लिए एआई आधारित प्रवेश परामर्श सेवा और ऑनलाइन शिकायत निवारण व्यवस्था विकसित की गई है। विश्वविद्यालय को प्राप्त कुल 5,707 शिकायतों में से 5,686 का निर्धारित समय में निराकरण किया गया। शिक्षार्थियों की पढ़ाई को आसान बनाने के लिए 913 वीडियो व्याख्यान उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि 2,65,208 शैक्षणिक अभिलेख डिजिलॉकर पर अपलोड किए जा चुके हैं।

शोध एवं आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए पीएम-उषा योजना के अंतर्गत 20 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की नई वेबसाइट, परीक्षा अभिलेख डिजिटलीकरण पोर्टल और पत्रिका ‘अभ्युदय’ का शुभारंभ किया गया।

शिक्षा के सामाजिक सरोकारों को आगे बढ़ाते हुए विश्वविद्यालय की ओर से एकलव्य विद्यालय देवपहरी के 311 विद्यार्थियों को बैग, स्वेटर, टिफिन एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई। यह पहल विश्वविद्यालय की उस सोच को प्रदर्शित करती है, जिसमें शिक्षा को केवल अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित न रखकर जरूरतमंद और वंचित वर्गों तक अवसर पहुंचाने का माध्यम बनाया जा रहा है।

कुल मिलाकर पंडित सुन्दरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय का सप्तम दीक्षांत समारोह केवल 24,800 शिक्षार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव नहीं रहा, बल्कि इसने उच्च शिक्षा के विस्तार, रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों, डिजिटल सुविधाओं, शोध और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को भी सामने रखा। समारोह में बड़ी संख्या में शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षार्थी और प्रदेश के प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

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