Thursday, February 12, 2026
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बिलासपुर सेंट्रल जेल में कैदियों पर अत्याचार का आरोप: परिजनों ने उठाई अवैध वसूली और प्रताड़ना की आवाज़, जानिए जेल अधीक्षक ने क्या कहा…

बिलासपुर सेंट्रल जेल में बंद कैदियों के परिजनों ने जेल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों द्वारा जेल में कैदियों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार और अवैध वसूली की शिकायत करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस, डीजी जेल, कलेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। इन आरोपों के बाद जेल प्रशासन और पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है।

परिजनों के अनुसार, जेल प्रशासन कैदियों से बेहतर सुविधाओं की आड़ में अवैध वसूली कर रहा है। यदि पैसे नहीं दिए जाते, तो कैदियों को जान-बूझकर घटिया और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भोजन दिया जाता है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि चाय में शक्कर और चाय पत्ती नहीं डाली जाती, दाल पानी जैसी पतली होती है, और चावल की गुणवत्ता बेहद खराब होती है।

इसके अलावा, जेल के अंदर प्रतिबंधित नशीली पदार्थों की उपलब्धता की भी शिकायत की गई है। बताया गया है कि जेल के अंदर बीड़ी, तंबाकू और गांजा जैसी नशीली वस्तुएं आसानी से कई गुना दामों पर उपलब्ध कराई जाती हैं। इस संबंध में मुख्य आरोप जेल में बंद विराट अपहरण मामले के आरोपी अनिल सिंह पर लगाया गया है, जिसके द्वारा कथित तौर पर इन नशीली वस्तुओं की आपूर्ति की जाती है। यदि कैदी इन वस्तुओं के लिए पैसे नहीं देते, तो उन्हें प्रताड़ित किया जाता है।

इन आरोपों के बाद जेल अधीक्षक ने कहा कि ये आरोप पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत हैं। उन्होंने दावा किया कि जेल में नियमित रूप से तलाशी अभियान चलाया जाता है और कैदियों को उनके स्वास्थ्य के अनुसार ही भोजन उपलब्ध करवाया जाता है। अधीक्षक ने यह भी कहा कि जेल प्रशासन कैदियों को किसी भी प्रकार से प्रताड़ित नहीं कर रहा है, और कैदियों को मिलने वाली सुविधाएं नियमानुसार दी जा रही हैं।

इस मामले के बाद जेल सुधारों की दिशा में एक गंभीर बहस छिड़ गई है। यह घटना इस ओर इशारा करती है कि जेलों में पारदर्शिता और अनुशासन की कमी हो सकती है। कैदियों को बुनियादी मानवीय सुविधाएं प्रदान करना और उन्हें सम्मानजनक व्यवहार देना आवश्यक है। यदि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल जेल प्रशासन की विफलता होगी, बल्कि न्यायिक व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा होगा।

अब देखना यह होगा कि इस मामले की जांच में क्या निष्कर्ष निकलते हैं और क्या जेल में सुधार की दिशा में कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

बिलासपुर सेंट्रल जेल में कैदियों के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं। यदि इन आरोपों की जांच निष्पक्ष रूप से की जाती है, तो यह जेल प्रणाली में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। जेल में बंद व्यक्ति को बुनियादी मानवाधिकारों का सम्मान मिलना चाहिए, और इस तरह के आरोप समाज और न्यायिक प्रणाली के प्रति हमारी जिम्मेदारियों पर पुनर्विचार करने का अवसर प्रदान करते हैं।

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