बिलासपुर जिले के तहसील बोदरी में भूमि सीमांकन को लेकर एक गंभीर विवाद ने किसानों के जीवन में मानसिक और आर्थिक कठिनाइयों का अंबार खड़ा कर दिया है। ग्राम पंचायत प.ह.नं. 3 रा.नि.मं. की भूमि खसरा नंबर 1561/1 और 1561/3 से जुड़े इस विवाद में किसान परिवार महीनों से प्रशासन की लापरवाही का शिकार हो रहे हैं। मंगलवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में किसानों ने अपनी समस्याओं को उजागर किया और प्रशासन से जल्द से जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की।
प्रमुख पीड़ित किसान देवी प्रसाद कौशिक और कृष्णा केवट ने बताया कि भूमि खसरा नंबर 1561/1 का रकबा पहले 3.88 एकड़ था, जिसे लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग द्वारा अधिग्रहित किया गया। इसके बाद शेष भूमि 2.76 एकड़ मनमोहन कौशिक के नाम पर दर्ज है। इसी तरह, खसरा नंबर 1561/3 की 0.44 एकड़ भूमि का कुछ हिस्सा भी अधिग्रहित हो चुका है, और शेष 0.16 एकड़ भूमि खेदूराम के नाम पर दर्ज है।
हालांकि, समीपस्थ भूमि के मालिक अमितेष आगरे द्वारा खसरा नंबर 1560/1 और 1560/2 में सीमांकन कराने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों का आरोप है कि सीमांकन प्रक्रिया में अनियमितताएं हैं, और उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के ही सीमांकन पंचनामा तैयार कर दिया गया। किसानों ने तहसीलदार के सामने 23 जनवरी 2024 को आपत्ति दर्ज की, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
इस विवाद में प्रशासन की लापरवाही स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। सीमांकन की प्रक्रिया में देरी और पारदर्शिता की कमी के चलते किसान गंभीर मानसिक और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। जब किसानों ने एस.डी.एम. बिल्हा के कार्यालय में मुआवजे के लिए आवेदन किया, तो उन्हें एक ही सड़क का अलग-अलग नक्शा दिया गया, जिससे भ्रम की स्थिति और भी बढ़ गई।
किसानों का यह भी आरोप है कि खसरा नंबर 1561/1 और 1561/3 के अधिग्रहित हिस्सों पर अवैध कब्जे की कोशिशें की जा रही हैं। अमितेष आगरे द्वारा कथित रूप से भूमि पर अवैध कब्जे का प्रयास किया जा रहा है, जो कि न्यायिक दृष्टिकोण से पूरी तरह गलत है। इस संदर्भ में किसानों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि अवैध कब्जों को तुरंत रोका जाए और सीमांकन प्रक्रिया को पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाए।
किसानों ने मांग की है कि भूमि विवाद के समाधान के लिए एक नई सीमांकन टीम का गठन किया जाए, जिसमें निष्पक्ष अधिकारी शामिल हों ताकि किसी भी प्रकार की धांधली न हो। किसानों ने इस बात पर जोर दिया है कि पिछले एक साल से वे मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो स्थिति और बिगड़ सकती है, जिससे अप्रिय घटनाएं घटित हो सकती हैं।
इस विवाद के चलते किसान समुदाय में निराशा और आक्रोश व्याप्त है। वे प्रशासन से यह अपेक्षा कर रहे हैं कि जल्द से जल्द उनकी समस्या का समाधान निकाला जाए, ताकि वे फिर से अपने खेतों में काम कर सकें और उनकी आजीविका प्रभावित न हो।
भूमि सीमांकन विवाद न केवल बिलासपुर में बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है, और ऐसे मामलों में पारदर्शिता और उचित प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उम्मीद है कि इस मामले में भी प्रशासन उचित कदम उठाएगा और किसानों को न्याय मिलेगा।


