Thursday, February 12, 2026
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छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती में गड़बड़ी: राजनांदगांव में भर्ती प्रक्रिया रद्द, बड़ी संख्या में अभ्यर्थी थे शामिल, आरक्षक की आत्महत्या से मामला और गंभीर…

छत्तीसगढ़ में पुलिस भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के खुलासे के बाद सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राजनांदगांव जिले में पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने यह कड़ा निर्णय लिया। इस मामले में गड़बड़ी का खुलासा होने के बाद अब तक कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक आरोपी आरक्षक ने आत्महत्या कर ली है।

राजनांदगांव जिले में 16 नवंबर 2024 से शुरू हुई पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की जानकारी सामने आई थी। फिजिकल टेस्ट के अंकों में हेरफेर और अनियमितताओं की शिकायतों के बाद प्रदेश सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए मामले की जांच के आदेश दिए। इसके तहत 16 दिसंबर 2024 को लालबाग थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

जांच के दौरान अब तक दो आरक्षक, दो कंप्यूटर ऑपरेटर और एक अभ्यर्थी को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसी बीच, इस घोटाले में संदिग्ध आरक्षक अनिल रत्नाकर ने 21 दिसंबर 2024 को आत्महत्या कर ली। उसका शव फांसी पर लटका मिला। रत्नाकर की मौत ने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में करीब 63,000 से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। फिजिकल टेस्ट के दौरान सामने आई गड़बड़ियों ने न केवल भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए, बल्कि हजारों उम्मीदवारों के भविष्य पर भी अनिश्चितता का साया डाल दिया।

गड़बड़ी सामने आने के बाद सरकार ने साफ संदेश दिया है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गृहमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और नई भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से शुरू की जाएगी।

इस घटना ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को उजागर किया है। राजनांदगांव में भर्ती प्रक्रिया रद्द करना सरकार का एक साहसिक कदम है, लेकिन इससे प्रभावित उम्मीदवारों के भविष्य को लेकर सवाल भी खड़े हो गए हैं। अब सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे ऐसी व्यवस्थाएं करें, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

यह घटना न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश में भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार और पारदर्शिता की मांग को मजबूती से सामने लाती है। सरकार की सख्त कार्रवाई और सुधार की दिशा में उठाए गए कदम भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने में अहम साबित हो सकते हैं।

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