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बिलासपुर में भूमाफियाओं का बढ़ता आतंक: दर-दर भटकने को मजबूर एक रेलवे कर्मचारी की बेबसी और प्रशासन की नाकामी…

बिलासपुर। शहर में भूमाफियाओं का जाल दिनोंदिन गहराता जा रहा है। ये भूमाफिया फर्जी दस्तावेजों और मिलीभगत से जमीन पर कब्जा करने का खेल खेलते हैं, और इसका शिकार बनता है एक सामान्य नागरिक। ऐसा ही एक मामला अमेरी में सामने आया है, जहां रेलवे कर्मचारी मनोज कुमार डिक्सेना अपनी ही जमीन को बचाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

मनोज कुमार डिक्सेना ने ग्राम अमेरी स्थित खसरा नंबर 13/48 के 40×60 के प्लॉट को खरीदा था। प्लॉट खरीदने के बाद उन्होंने नामांतरण और डायवर्सन प्रक्रिया पूरी कर दी थी। अपनी जमीन की सुरक्षा के लिए उन्होंने चारदीवारी भी बनवाई। लेकिन, अब यह जमीन भूमाफिया भानु सिंह राजपूत के निशाने पर है। मनोज का आरोप है कि भानु सिंह ने मिलीभगत से इस जमीन का खसरा नंबर बदलकर 13/6 दिखाया और बलपूर्वक कब्जा करने की कोशिश की।

भूमाफिया और प्रशासन की मिलीभगत का आरोप
मनोज कुमार का कहना है कि उनकी जमीन के पास स्थित अन्य प्लॉट भी खसरा नंबर 13/38 का ही हिस्सा हैं। ऐसे में बीच में नए खसरे का जन्म प्रशासन और भूमाफियाओं की मिलीभगत को साफ दर्शाता है।

जब 25 नवंबर को भानु सिंह ने अवैध कब्जा करने की कोशिश की, तो मनोज ने तहसीलदार और थाना सकरी में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद उन्होंने कलेक्टर और एसपी के पास भी अपनी बात रखी। लेकिन, हर जगह से निराशा ही हाथ लगी। प्रशासन की इस उदासीनता ने मनोज को हताश कर दिया है।

भूमाफियाओं का संगठित अपराध
भूमाफिया सिर्फ एक व्यक्ति या परिवार को नहीं, बल्कि पूरे समाज को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ये लोग फर्जी दस्तावेज तैयार करके जमीनों पर कब्जा करते हैं और फिर इन्हीं जमीनों को बेच देते हैं। इस प्रक्रिया में प्रशासन की चुप्पी और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत इन अपराधियों के हौसले बुलंद करती है।

सामान्य नागरिक की बेबसी
आज स्थिति यह हो गई है कि एक आम आदमी अपनी मेहनत की कमाई से खरीदी गई जमीन को भी सुरक्षित नहीं रख सकता। मनोज कुमार जैसे पीड़ित लोगों के लिए न्याय पाना मुश्किल हो गया है। पटवारी, तहसीलदार, थाना, एसपी, कलेक्टर, हर जगह गुहार लगाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं होती। प्रशासन का यह रवैया स्पष्ट करता है कि “जब संया भये कोतवाल तो डर काहे का।”

क्या करें पीड़ित?
मनोज कुमार जैसे पीड़ितों के लिए यह सवाल सबसे बड़ा है कि वे अपनी शिकायत लेकर कहां जाएं। एक ओर प्रशासन भूमाफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम है, तो दूसरी ओर भूमाफिया अपने फर्जीवाड़े से बेबस नागरिकों को शिकार बना रहे हैं।

जरूरत है सख्त कानून 
भूमाफियाओं के बढ़ते आतंक को रोकने के लिए सख्त कानून और ईमानदार प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता है। जब तक प्रशासन की भूमिका निष्पक्ष नहीं होगी, तब तक ऐसे मामले बढ़ते रहेंगे।

मनोज कुमार डिक्सेना का यह मामला सिर्फ एक घटना नहीं है, बल्कि यह समाज के उस तबके की पीड़ा को उजागर करता है, जो अपनी मेहनत की पूंजी से खरीदी गई जमीन को भी सुरक्षित नहीं रख पा रहा। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन ऐसे मामलों में सख्ती दिखाएगा, या भूमाफियाओं का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।

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