क्राइमछत्तीसगढ़

तमनार में उबाल: अवैध जनसुनवाई के खिलाफ हजारों ग्रामीणों का थाने का किया घेराव, प्रशासन और उद्योगों पर गंभीर आरोप…

रायगढ़।
रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में मंगलवार को हालात उस वक्त तनावपूर्ण हो गए, जब हजारों ग्रामीणों ने तमनार थाना का घेराव कर लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि 8 दिसंबर को आयोजित की गई कथित अवैध जनसुनवाई के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि उसके विरोध में हुए आंदोलन पर पुलिस ने ग्रामीणों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली।

इसी दोहरे रवैये के विरोध में ग्रामीण बड़ी संख्या में थाने पहुंचे और अवैध जनसुनवाई के जिम्मेदारों पर FIR दर्ज करने की मांग को लेकर डटे हुए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, लेकिन ग्रामीण पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।


ग्रामीणों के गंभीर आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि 8 दिसंबर को आयोजित जनसुनवाई पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और निर्धारित प्रक्रियाओं का खुला उल्लंघन थी।
उनका आरोप है कि—

  • ग्रामीणों को अपनी बात रखने से रोका गया
  • विरोध करने वालों को जबरन बाहर निकाल दिया गया
  • भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कार्यक्रम कराया गया
  • पूरी प्रक्रिया पहले से तय स्क्रिप्ट के तहत पूरी की गई

ग्रामीणों का कहना है कि यह जनसुनवाई नहीं, बल्कि औद्योगिक परियोजनाओं को जबरन थोपने की एक औपचारिकता थी।


आंदोलनकारियों पर FIR, असली दोषियों पर चुप्पी?

जनसुनवाई के बाद ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू किया, लेकिन पुलिस ने आंदोलन में शामिल ग्रामीणों पर FIR दर्ज कर दी।
इसी को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं—

  • अगर अवैध जनसुनवाई से हालात बिगड़े, तो FIR आंदोलनकारियों पर क्यों?
  • जिन अधिकारियों और उद्योगपतियों ने नियम तोड़े, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं?

इन्हीं सवालों को लेकर आज हजारों ग्रामीण थाने पहुंचे और घेराव कर दिया।


पहले से ही औद्योगिक दबाव में तमनार

तमनार क्षेत्र पहले से ही भारी औद्योगिक दबाव झेल रहा है। यहां कई बड़े उद्योग पहले ही स्थापित हो चुके हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि—

  • जंगल, जमीन और जल संसाधनों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है
  • आदिवासी गांव विस्थापन की कगार पर पहुंच चुके हैं

ग्रामीणों का आरोप है कि 8 दिसंबर की जनसुनवाई भी इसी औद्योगिक विस्तार की कड़ी थी, जिसे प्रशासन और उद्योगों की मिलीभगत से आगे बढ़ाया गया।


थाने के बाहर जनसैलाब, नारेबाजी जारी

मंगलवार को तमनार थाना परिसर के बाहर हजारों ग्रामीण जुटे रहे। नारेबाजी जारी है और ग्रामीण साफ कह रहे हैं कि जब तक अवैध जनसुनवाई के मामले में FIR दर्ज नहीं होती, वे यहां से नहीं हटेंगे।

स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है।


प्रशासन और राजनीतिक तंत्र पर सीधे सवाल

इस आंदोलन में पहली बार ग्रामीणों ने खुलकर प्रशासनिक और राजनीतिक तंत्र को कटघरे में खड़ा किया है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें हैं—

  • अवैध जनसुनवाई कराने वाले अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाए
  • पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन की निष्पक्ष जांच हो
  • दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए

ग्रामीणों का कहना है कि यह लड़ाई अब सिर्फ जनसुनवाई की नहीं, बल्कि न्याय और संविधान की है।


अब बड़ा सवाल

  • क्या कानून सिर्फ आंदोलनकारियों के लिए है?
  • क्या प्रशासन और उद्योग पर्यावरण कानूनों से ऊपर हैं?
  • क्या तमनार की आवाज को दबाने की कोशिश हो रही है?

आज तमनार सिर्फ एक थाने का घेराव नहीं कर रहा,
बल्कि पूरे तंत्र से जवाब मांग रहा है।

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