क्राइम

नाबालिग के हाथों स्टेयरिंग थमाना पड़ा भारी! सड़क हादसे में युवक गंभीर घायल, पुलिस ने कार मालिक पर कसा शिकंजा…

बच्चों को वाहन देना लापरवाही नहीं, दूसरों की जिंदगी से खिलवाड़; सरकण्डा पुलिस ने स्विफ्ट कार की जब्त, आम लोगों के लिए बड़ा सबक

बिलासपुर। नाबालिग बच्चों के हाथों में वाहन थमाकर उनकी जिद पूरी करना और फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार करना कितना खतरनाक साबित हो सकता है, इसका एक मामला सरकण्डा थाना क्षेत्र में सामने आया है। स्वर्णिम एरा, गीतांजलि सिटी के पास तेज रफ्तार और कथित लापरवाही से चलाई जा रही मारुति सुजुकी स्विफ्ट कार ने एक मोटरसाइकिल सवार युवक को टक्कर मार दी। हादसे में युवक के बाएं पैर सहित शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं और उसे उपचार के लिए बिलासपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस की विवेचना में कार चलाने वाला नाबालिग पाया गया। इसके बाद पुलिस ने वाहन मालिक के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए दुर्घटना में इस्तेमाल कार जब्त कर ली।

यह मामला सिर्फ एक सड़क दुर्घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि उन अभिभावकों और वाहन मालिकों के लिए भी चेतावनी है, जो बिना कानूनी पात्रता और पर्याप्त जिम्मेदारी का विचार किए बच्चों को कार या बाइक की चाबी सौंप देते हैं। कुछ मिनट की लापरवाही किसी दूसरे परिवार की जिंदगी में लंबे समय का दर्द बन सकती है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 12 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 3:30 बजे स्वर्णिम एरा, गीतांजलि सिटी के पास दुर्घटना हुई। अन्नपूर्णा कॉलोनी, गणेश नगर, सिरगिट्टी निवासी साहिल खान की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके बड़े भाई समीर खान मोटरसाइकिल क्रमांक CG 10 AW 2894 से काम पर जा रहे थे। इसी दौरान सामने से आ रही सफेद रंग की मारुति सुजुकी स्विफ्ट कार क्रमांक CG 10 BE 1235 के चालक ने कथित तौर पर तेज गति और लापरवाही से वाहन चलाते हुए उन्हें दाहिनी ओर से टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी गंभीर थी कि समीर खान के बाएं पैर और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आईं। उन्हें इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। शिकायत के आधार पर सरकण्डा पुलिस ने अपराध क्रमांक 1480/2026 दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू की।

विवेचना के दौरान पुलिस को पता चला कि दुर्घटना के समय कार एक नाबालिग बालक चला रहा था। पुलिस के अनुसार, नाबालिग को विधिवत अभिरक्षा में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई और जमानत मुचलके पर रिहा किया गया।

वहीं, वाहन मालिक ओमप्रकाश पिता हेतराम श्रीवास, निवासी स्वर्णिम एरा, सरकण्डा के कब्जे से पुलिस ने दुर्घटना में इस्तेमाल सफेद स्विफ्ट कार, उसकी चाबी और दस्तावेज जब्त कर लिए। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 281 और 125(a) के साथ मोटर व्हीकल एक्ट की धाराओं 3/181, 4/181 और 5/180 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने बताया कि प्रकरण में आगे की विवेचना जारी है।

इस घटना से आम लोगों को सबसे बड़ा सबक यही मिलता है कि नाबालिग को वाहन चलाने देना केवल यातायात नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालना भी है। कार या बाइक चलाना शौक, दिखावे या बच्चों की जिद पूरी करने का साधन नहीं है। इसके लिए कानूनी पात्रता, प्रशिक्षण, समझदारी और जिम्मेदारी जरूरी है।

अभिभावकों को यह समझना होगा कि घर में खड़ा वाहन उनकी निजी संपत्ति जरूर है, लेकिन उसे चलाकर सड़क पर निकलने वाला व्यक्ति सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी भी निभाता है। एक नाबालिग की छोटी-सी चूक किसी राहगीर को अस्पताल पहुंचा सकती है, किसी परिवार की रोजी-रोटी छीन सकती है और किसी घर की खुशियों को लंबे समय के लिए प्रभावित कर सकती है।

नियम तोड़ने वालों के लिए स्पष्ट संदेश

सरकण्डा पुलिस की यह कार्रवाई वाहन मालिकों के लिए चेतावनी है कि नाबालिगों को वाहन सौंपने से जुड़े मामलों को हल्के में न लें। दुर्घटना के बाद केवल चालक की गलती पर सवाल उठाना पर्याप्त नहीं है; यह भी देखना जरूरी है कि वाहन उसे किसने और किन परिस्थितियों में दिया था।

याद रखें—बच्चों के हाथ में वाहन की चाबी सौंपना आसान है, लेकिन उसके परिणामों की जिम्मेदारी से बचना आसान नहीं। कुछ मिनट की खुशी के लिए किसी दूसरे की जिंदगी जोखिम में डालना न समझदारी है, न जिम्मेदार अभिभावक होने की पहचान। सड़क पर नियमों का पालन कीजिए, नाबालिगों को वाहन न दीजिए और अपने साथ-साथ दूसरों की जिंदगी की सुरक्षा भी सुनिश्चित कीजिए।

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