बिलासपुर। शहर में अवैध कब्जों और भू-उपयोग परिवर्तन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, लेकिन अब मामला सीधे एक आवासीय कॉलोनी की उस जमीन तक पहुंच गया है जिसे बच्चों, बुजुर्गों और सार्वजनिक उपयोग के लिए गार्डन के रूप में सुरक्षित रखा गया था। मुंगेली रोड स्थित 36 मॉल के पास रामदेव मिल के बगल में विकसित संकटमोचन वाटिका कॉलोनी में रहवासियों ने गार्डन की आरक्षित भूमि पर कथित अवैध कब्जे और रास्ता निर्माण का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले को लेकर कॉलोनीवासियों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है।
रहवासियों का आरोप है कि कॉलोनी के स्वीकृत लेआउट में जिस भूमि को गार्डन के लिए छोड़ा गया था, उसी हिस्से पर अब अवैध रूप से रास्ता बना दिया गया है। दावा किया गया है कि इस रास्ते का उपयोग आसपास विकसित हो रही दूसरी कॉलोनियों को जोड़ने के लिए किया जा रहा है। इसका सीधा असर संकटमोचन वाटिका की आंतरिक व्यवस्था, सुरक्षा और यातायात पर पड़ रहा है। बाहरी वाहनों और लोगों की आवाजाही बढ़ने से रहवासी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
कॉलोनीवासियों ने आवेदन के साथ आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि ग्राम मंगला स्थित खसरा नंबर 1532/3 और 1532/4 की लगभग 0.64 एकड़ भूमि पर 16 नवंबर 1999 को नगर निगम द्वारा लेआउट स्वीकृत किया गया था। उस स्वीकृति में गार्डन के लिए भूमि आरक्षित होना स्पष्ट रूप से दर्ज है। रहवासियों का कहना है कि आज तक इस लेआउट में किसी प्रकार का संशोधन नहीं हुआ है, ऐसे में गार्डन की जमीन को सड़क में बदलना पूरी तरह नियमों के विपरीत है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि जमीन गार्डन के लिए आरक्षित थी, तो आखिर उस पर रास्ता कैसे बना? क्या बिना अनुमति भू-उपयोग बदल दिया गया? और यदि ऐसा हुआ तो जिम्मेदार कौन है? यही वजह है कि अब कॉलोनीवासियों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है।
रहवासियों ने यह भी बताया कि इस मामले को लेकर 10 जनवरी 2025 को नगर निगम में शिकायत दी गई थी। उस दौरान गार्डन की जमीन बेचे जाने की चर्चाएं भी सामने आई थीं और जांच की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया। आरोप है कि प्रशासनिक सुस्ती और प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण अब तक अतिक्रमण नहीं हटाया गया।
वरिष्ठ पत्रकार रुद्र अवस्थी, डीपी पांडेय, आलोक अग्रवाल, श्रीपाल सिंह, ताराचंद चौबे, संतोष गुप्ता, विकास बिसेन सहित बड़ी संख्या में कॉलोनीवासियों ने मांग की है कि गार्डन की भूमि का सीमांकन कराया जाए, अतिक्रमण हटाया जाए और वहां सार्वजनिक गार्डन विकसित किया जाए। उनका कहना है कि जब शहरभर में सरकारी और सार्वजनिक जमीनों से कब्जे हटाने की कार्रवाई हो रही है, तो फिर उनकी कॉलोनी के मामले में प्रशासन चुप क्यों है?
अब यह मामला केवल एक कॉलोनी के गार्डन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर रहा है कि क्या शहर में स्वीकृत लेआउट और सार्वजनिक उपयोग की जमीनें सुरक्षित हैं? यदि गार्डन की जमीन पर सड़क बनाई जा सकती है, तो आने वाले समय में बच्चों के खेलने के मैदान, पार्क और सार्वजनिक सुविधाएं कितनी सुरक्षित बचेंगी — यह चिंता अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन चुकी है।


