बिलासपुर। शहर में लगातार महिलाओं के गले से सोने की चैन छीनने और लूट की वारदातों से फैली दहशत के बीच बिलासपुर पुलिस ने एक बड़े अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश कर दिया है। उड़ीसा से संचालित इस संगठित गैंग के छह सदस्यों की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि अपराधी अब सीमाओं से परे जाकर योजनाबद्ध तरीके से शहरों को अपना निशाना बना रहे हैं।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह उड़ीसा से बिलासपुर पहुंचता था, स्थानीय सहयोगियों के यहां ठहरता था और फिर महिलाओं को आसान शिकार समझकर चैन स्नैचिंग और लूट की वारदातों को अंजाम देता था। खास बात यह है कि आरोपी सुनसान इलाकों और सुबह के समय अकेली महिलाओं पर नजर रखते थे और मौका मिलते ही वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाते थे।
मामले का खुलासा तब हुआ जब तोरवा क्षेत्र की एक महिला के गले से सुबह-सुबह सोने की चैन झपट ली गई। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की बारीकी से जांच की। इसी दौरान सिरगिट्टी क्षेत्र में हुई एक अन्य लूट की घटना के फुटेज भी खंगाले गए। तकनीकी विश्लेषण और आरोपियों की गतिविधियों के मिलान से पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि दोनों वारदातों के पीछे एक ही गिरोह सक्रिय है।
जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि पुलिस ने सिर्फ घटनास्थल तक सीमित रहने के बजाय अपराधियों की पूरी गतिविधियों की कड़ी जोड़ी। मुखबिरों की सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गणेश नगर निवासी नवीन साहू को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में उसने पूरे नेटवर्क का खुलासा कर दिया। इसके बाद पुलिस ने उड़ीसा के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार यह कोई सामान्य झपटमार गिरोह नहीं बल्कि एक संगठित अपराध सिंडिकेट की तरह काम कर रहा था। गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों में जाकर स्थानीय संपर्कों की मदद से ठिकाना बनाते थे और फिर महिलाओं को निशाना बनाकर वारदातों को अंजाम देते थे। यही कारण है कि पुलिस ने इस मामले में केवल लूट और चैन स्नैचिंग की धाराएं ही नहीं, बल्कि संगठित अपराध और आपराधिक षड्यंत्र की धाराएं भी जोड़ी हैं।
यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि हाल के महीनों में शहर में चैन स्नैचिंग की घटनाएं बढ़ी थीं। महिलाओं में भय का माहौल था और पुलिस पर अपराधियों को पकड़ने का दबाव भी बढ़ रहा था। ऐसे में अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश न केवल पुलिस की बड़ी सफलता है, बल्कि यह अपराधियों के लिए भी स्पष्ट संदेश है कि तकनीक और खुफिया नेटवर्क के दम पर कानून के हाथ अब काफी लंबे हो चुके हैं।
हालांकि पुलिस की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। गिरोह के तीन अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और आशंका जताई जा रही है कि इस नेटवर्क का संबंध अन्य राज्यों में हुई समान वारदातों से भी जुड़ा हो सकता है। यदि ऐसा हुआ तो यह खुलासा और भी बड़े अपराध नेटवर्क तक पहुंच सकता है।
फिलहाल बिलासपुर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि बाहरी व्यक्तियों की जानकारी स्थानीय पुलिस को दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना साझा करें। क्योंकि अपराध के खिलाफ सबसे मजबूत हथियार केवल पुलिस नहीं, बल्कि जागरूक नागरिक भी होते हैं।
साफ है कि इस बार पुलिस ने सिर्फ आरोपियों को नहीं पकड़ा, बल्कि शहर में सक्रिय एक संगठित अपराध तंत्र की कमर तोड़ने का काम किया है।


