Sunday, March 15, 2026
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बिलासपुर: नगर निगम से टेंडर पाने ठेकेदार जितेंद्र कुमार ने खेला बड़ा खेल… ई-पंजीयन का फर्जी दस्तावेज किया पेश…और मिल गया टेंडर…निगम अफसरों की भूमिका संदिग्ध…

बिलासपुर। फर्जी दस्तावेज पेश कर नगर निगम से लाखों रुपए के निर्माण कार्य का ठेका हथियाने का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि ठेकेदार ने ई-पंजीयन की फर्जी प्रति के जरिए अफसरों से मिलीभगत कर यह ठेका हासिल किया है।

टिकरापारा निवासी गवर्नमेंट सिविल कांट्रेक्टर अनिल मजुमदार के अनुसार नगर निगम प्रशासन ने जोन क्रमांक 4 (अब 6) में 18 निर्माण कार्य के लिए 19 सितंबर 2019 को एक टेंडर निकाला। 14 अक्टूबर टेंडर भने की अंतिम तिथि थी। टेंडर में वार्ड क्रमांक 42 स्थित सामुदायिक भवन की रिपेयरिंग और पेंटिंग की प्राक्कलन राशि 4 लाख रुपए और वार्ड क्रमांक 43 स्थित सामुदायिक भवन सीनियर क्लब की रिपेयरिंग पेंटिंग की प्राक्कलन राशि 4 लाख रुपए थी। दोनों कार्यों के लिए ठेकेदार जितेंद्र कुमार ठाकुर, मयंक गुप्ता और अनिल मजुमदार ने टेंडर भरा। 15 अक्टूबर को टेंडर खोला गया, जिसमें सबसे कम रेट वाले ठेकेदार जितेंद्र कुमार ठाकुर को दोनों कार्यों का ठेका मिल गया। सिविल कांट्रेक्टर अनिल ने बताया कि टेंडर नहीं मिलने पर उन्होंने ठेकेदार जितेंद्र कुमार ठाकुर द्वारा पेश सारे दस्तावेज की कापी निकलवाई। अनिल मजुमदार का आरोप है कि जितेंद्र कुमार ई-पंजीयन के दस्तावेज में कूटरचना की है।

जितेंद्र कुमार ने (www.pwd.cg.nic.in) में 4 अक्टूबर 2014 को ई-पंजीयन कराया था। यह ई-पंजीयन 5 साल के लिए वैध था। इस हिसाब से ई-पंजीयन की वैधता तिथि 3 अक्टूबर 2019 को समाप्त हो गई थी। यानी कि जिस दिन टेंडर खोला गया, उस दिन जितेंद्र कुमार के ई-पंजीयन की वैधता तिथि समाप्त हो गई थी। अनिल मजुमदार का आरोप है कि जितेंद्र कुमार ने वैधता तिथि दिखाने के लिए ई-पंजीयन की तारीख में छेड़छाड़ की है। मसलन, उन्होंने 4 अक्टूबर 2014 की जगह 4 अक्टूबर 2015 दर्ज कर कंप्यूटराइज्ड कापी जमा की। इस तरह से कूटरचना कर जितेंद्र कुमार ने टेंडर हथिया लिया।

निगम अफसरों की भूमिका संदिग्ध

अनिल मजुमदार ने बताया कि किसी आवेदन को स्वीकार करने से पहले संबंधित विभाग उसमें संलग्न दस्तावेज की बारीकी से जांच करता है। जाहिर है, नगर निगम के अफसरों ने भी जितेंद्र कुमार के आवेदन में संलग्न दस्तावेज की जांच की होगी, जिसमें उसके द्वारा की गई कूटरचना का पता चल गया होगा। इसके बाद भी उसके आवेदन को स्वीकार करना यह साबित करता है कि निगम अफसरों की भूमिका भी कहीं न कहीं संदिग्ध है।

निगम आयुक्त तक पहुंचा मामला

सिविल कांट्रेक्टर अनिल मजुमदार ने ठेकेदार जितेंद्र कुमार द्वारा पेश कूटरचित दस्तावेज की कॉपी निगम आयुक्त प्रभाकर पांडेय के नाम सौंप दी है। उन्होंने अपने आवेदन में पूरे मामले की जांच कर ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर कराने की मांग की है।

जितेंद्र कुमार नहीं आया दस्तावेज लेकर

इस मामले में पक्ष जानने के लिए सोमवार दोपहर ठेकेदार जितेंद्र कुमार से उनके मोबाइल पर संपर्क किया गया। उन्होंने शिकायत होने की बात स्वीकार की और कहा कि अधिकारी जांच कर रहे हैं। पूरा मामला साफ हो जाएगा। उन्होंने सारे दस्तावेज वैध होने का दावा किया और कहा कि वह शाम 5 से 6 बजे के बीच दस्तावेज लेकर आएंगे, लेकिन मंगलवार शाम 5 बजे वह दस्तावेज लेकर नहीं आया।

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