Tuesday, April 7, 2026
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बिलासपुर: पनिका जाति को पूर्व की भांति अनुसूचित जनजाति जाति में शामिल करने की मांग, मुख्यमंत्री नाम सौंपा ज्ञापन…

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में रहने वाले पनिका जाति को अविभाजित मध्यप्रदेश 1971 के पहले की तरह अनुसूचित जनजाति में यथावत रखने हेतु राज्य शासन में लंबित प्रस्ताव को पारित कर केन्द्र सरकार को भेजने तथा राज्य सरकार की जनहितैषी योजना “बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओं” के परिपालन में त्वरित न्याय प्रदान करते हुए केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति संबंधित जारी सूची के सरल क्रमांक 39 से की जा सकती है जिसे तत्कालीन राज्य सरकार ने दिनांक 08 दिसम्बर 1971 के बाद से पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में जोड़ दिया गया है, जो राज्य सरकार की दुर्भाग्यपूर्ण कार्यवाही है।

मुख्यमंत्री ने नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने आए समाज के लोगों ने पत्रकारों से कहा की इस जाति के समाजिक जनों का विकास, उत्थान एवं प्रगति पूरी तरह बाधित हो रहा है इसलिए की अविभाजित मध्यप्रदेश के मात्र 8 जिलों में यह जाति जहां अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शमिल है वहीं छत्तीसगढ़ राज्य में पिछड़ा वर्ग में शामिल है किसी भी जाति में फेरबदल अथवा हटाने का अधिकार भारतीय संसद को होता है।

ऐसी विषंगति की वजह से प्रदेश की लाखों बेटियाँ जो मध्यप्रदेश से शिक्षा प्राप्त कर छत्तीसगढ़ राज्य में ब्याही जाती है व छत्तीसगढ़ की बेटियाँ मध्यप्रदेश में विवाह होकर जाती हैं। तब उनके जाति संबंधित प्रकरणों में अनेक तरह की कठिनाइयों का उन्हें सामना करना पड रहा है। जो राज्य सरकार द्वारा “बेटी पढ़ाओं बेटी बचाओं” जैसी महत्त्वपूर्ण योजना को भी प्रभावित करता है इस तरह स्वाभाविक रूप से मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में निवासरत् इस जाति के परिजनों के बीच सामाजिक व पारिवारिक सद्भाव के साथ उनके धर्म व संस्कृति भी प्रभावित होते है जो लोकहित में नहीं है।

ऐसी विषंगतियों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए पनिका समाज छत्तीसगढ़ की यह मांग है कि वर्ष 1971 के पूर्व जिसे 8 दिसम्बर 1971 के बाद से अनुसूचित जनजाति की श्रेणी से हटाकर पिछड़ा वर्ग में जोड़ दिया गया है, को पूर्ववत् बनाये रखने अर्थात् अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में बहाल करने हेतु विधानसभा में विशेष प्रस्ताव लाकर उसे सर्वसम्मित से पारित कर केन्द्र सरकार को अतिशीघ्र भेजने की मांग की है। जिससे की प्रदेश की पनिका जाति को नैसर्गिक न्याय विधि सम्मत प्राप्त हो सके तथा लोकहित में सामाजिक विकास, उत्थान एवं प्रगति की परिकल्पना साकार हो सके।

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