बिलासपुर। महमंद ग्राम पंचायत में अवैध प्लॉटिंग के मामले में प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए तोड़फोड़ अभियान चलाया। कलेक्टर अवनीश शरण के निर्देश पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पीयूष तिवारी और नायब तहसीलदार राहुल शर्मा के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। खसरा नंबर 151/217 पर हो रही अवैध कालोनी निर्माण गतिविधियों को रोकने के लिए बुलडोजर चलाकर निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया।
इस कार्रवाई का मुख्य कारण बिना वैध अनुमति के किए जा रहे निर्माण और प्लॉटिंग का था। एसडीएम पीयूष तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस भूमि पर अवैध प्लॉटिंग की शिकायतें प्राप्त होने के बाद नायब तहसीलदार के माध्यम से जांच की गई, जिसके बाद यह पाया गया कि भूमि का उपविभाजन बिना किसी वैध अनुज्ञा के किया जा रहा था।
प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि भूमि का विकास, जैसे कि मार्ग निर्माण, समतलीकरण, बाउंड्रीवाल, नाली निर्माण, और उपखंडों का चिन्हांकन, किसी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना किया जा रहा था। इसके अलावा, उक्त भूमि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 172 के अंतर्गत व्यपवर्तित भूमि नहीं है, जिसका तात्पर्य है कि इस पर वैध तरीके से प्लॉटिंग और निर्माण नहीं किया जा सकता।
अवैध प्लॉटिंग करने वाले व्यक्ति हुसैन अली को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई संतोषजनक जवाब या वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। इसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया।
इस घटना के बाद प्रशासन ने यह संदेश दिया है कि जिले में अवैध निर्माण और प्लॉटिंग के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। यह कार्रवाई एक उदाहरण है कि बिना वैध दस्तावेज और अनुमति के किए गए किसी भी प्रकार के अनाधिकृत विकास कार्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी बताया कि ऐसी कार्रवाइयाँ आगे भी जारी रहेंगी, ताकि अवैध कॉलोनी निर्माण पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके।
बिलासपुर जिले में इस तरह की कार्रवाई से स्पष्ट है कि प्रशासन अवैध निर्माण और प्लॉटिंग के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है। इस प्रकार की कार्रवाइयों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों का विकास कानूनी ढांचे के तहत ही हो, जिससे भूमि विवादों और अराजकता से बचा जा सके।


