बिलासपुर जिले के मस्तुरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गतौरा गांव के ग्रामीणों को पिछले तीन वर्षों से बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। लगातार हो रही बिजली कटौती, लो वोल्टेज, जर्जर खंभों और झूलते बिजली तारों की समस्याओं ने ग्रामीणों की जिंदगी को असहज बना दिया है। ग्रामीणों की लंबे समय से अनसुनी की जा रही मांगों को आखिरकार सड़क पर आकर आवाज बुलंद करने का रूप देना पड़ा, और उन्होंने सड़क पर चक्का जाम कर दिया।
गांव के कई इलाकों में बिजली के तार तीन फीट की ऊंचाई पर झूल रहे हैं, जो किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। ट्रांसफार्मर की क्षमता कम होने के कारण पूरे गांव में लो वोल्टेज की समस्या बनी रहती है, जिससे लोगों के बिजली उपकरण खराब हो रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी गांव के छात्रों और किसानों को हो रही है। छात्रों को पढ़ाई के लिए रात में बिजली का इंतजार करना पड़ता है, जबकि किसानों को अपने पंप सेट चलाने के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिल पाती।
ग्रामीणों ने इन समस्याओं का समाधान करने के लिए बिजली विभाग और तहसील प्रशासन से कई बार गुहार लगाई, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलते रहे।
लगभग तीन साल से परेशान ग्रामीणों ने आखिरकार सड़कों पर उतरने का फैसला किया। तीन साल की समस्याओं और बिजली विभाग के अधिकारियों के आश्वासनों से थक चुके ग्रामीणों ने चक्का जाम कर दिया। लगभग एक महीने पहले बिजली विभाग और तहसीलदार ने समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उन्हें लिखित में कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक वे अपने विरोध को समाप्त नहीं करेंगे।
ग्रामीणों की मांगें
ग्रामीणों की मुख्य मांगें हैं:
- 1. पुराने और जर्जर हो चुके बिजली के खंभों को बदला जाए।
- 2. ट्रांसफार्मर की क्षमता को बढ़ाया जाए ताकि पूरे गांव को पर्याप्त बिजली मिल सके।
- 3. झूलते बिजली के तारों को तत्काल ठीक किया जाए ताकि किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके।
- 4. लो वोल्टेज की समस्या को खत्म करने के लिए नई केबलों का इस्तेमाल किया जाए।
बिजली विभाग की लगातार अनदेखी के कारण ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। जहां एक तरफ शासन विकास की बात करता है, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ता है। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती, तब तक वे अपना विरोध जारी रखेंगे।
अब यह देखना बाकी है कि प्रशासन और बिजली विभाग ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या का समाधान कब तक करता है। ग्रामीणों का यह प्रदर्शन एक संकेत है कि अगर उनकी आवाज को जल्द ही नहीं सुना गया, तो आंदोलन और भी व्यापक हो सकता है।
सरकार और संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गांवों में बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों का विकास सुचारू रूप से हो सके और लोगों को इस तरह के संघर्षों से न गुजरना पड़े।
ग्रामीणों की बिजली समस्या एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। तीन साल से चली आ रही समस्याओं ने उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। प्रशासन और बिजली विभाग को इस दिशा में तेजी से कदम उठाने की जरूरत है ताकि ग्रामीणों की समस्याओं का स्थायी समाधान हो सके।


