बिलासपुर, 23 अक्टूबर—बिलासपुर शहर में हाल ही में सड़क किनारे हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई की घटना सामने आई है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन और शहरी हरियाली को गंभीर नुकसान हुआ है। इस मामले को संज्ञान में लेते हुए कलेक्टर अवनीश शरण ने त्वरित और कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर शरण के आदेश पर, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के एसडीओ आदित्य ग्रोवर द्वारा सिविल लाइन थाने में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि मंगला चौक से उस्लापुर रोड पर स्थित गुलाब ज्वेलर्स के सामने, गुलमोहर के छह पेड़ अवैध रूप से काटे गए थे।
एसडीएम पीयूष तिवारी ने बताया कि पेड़ों की कटाई की सूचना मिलने पर तत्काल जांच की गई। जांच के दौरान नायब तहसीलदार नेहा विश्वकर्मा के नेतृत्व में राजस्व और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच में पुष्टि हुई कि पेड़ बिना किसी वैध अनुमति के काटे गए थे, जिससे शासकीय संपत्ति को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
इस घटना को गंभीर मानते हुए एसडीएम बिलासपुर ने पीडब्ल्यूडी एसडीओ को एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। इसके बाद, लोक संपत्ति नुकसानी निवारण अधिनियम 1984 की धारा 3 के तहत यह मामला दर्ज किया गया है। यह कानून शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान करता है।
इस तरह की घटनाएं न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं, बल्कि यह शहरी विकास में संतुलन को भी बाधित करती हैं। बिलासपुर प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और यह संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार की अवैध कटाई और शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर अवनीश शरण ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निगरानी और सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने सभी विभागों से समन्वय बनाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
यह घटना उन लोगों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है जो शहरी विकास के नाम पर हरे-भरे पेड़ों की कटाई को सामान्य मानते हैं। पर्यावरण को संरक्षित रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इस दिशा में कोई भी उल्लंघन सहन नहीं किया जाएगा।
बिलासपुर में पेड़ों की अवैध कटाई की इस घटना ने न केवल प्रशासन को सक्रिय किया है, बल्कि यह पर्यावरणीय मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करने का भी अवसर है। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई से यह उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर नियंत्रण रहेगा और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।


