बिलासपुर नगर निगम के राजकिशोर नगर जोन क्रमांक 7 में ठेकेदार मनीष सोनी का बढ़ता प्रभुत्व और अधिकारियों के साथ उसकी मिलीभगत शहर के विकास कार्यों और प्रशासनिक शुचिता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है। हाल ही में यह मामला तब और गंभीर हो गया जब सब इंजिनियर की कुर्सी पर मनीष सोनी को बैठकर सरकारी दस्तावेज़, खासकर माप पुस्तिका (जो कि बेहद संवेदनशील फाइल है), पर कुछ लिखते देखा गया। यह घटना अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच गहरे गठजोड़ और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।
सूत्रों के अनुसार, मनीष सोनी की निगम के भीतर पावर इतनी बढ़ चुकी है कि नगर निगम का कोई भी कार्य उसकी मंजूरी के बिना नहीं होता। इतना ही नहीं, अन्य ठेकेदारों के कार्यों में भी वह हस्तक्षेप करता है और अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर अपने फायदों के लिए निर्णयों को प्रभावित करता है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रही है, बल्कि शहर के विकास और सार्वजनिक परियोजनाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।
ठेकेदार संघ के व्हाट्सएप ग्रुप में ठेकेदार मनीष सोनी को इंजीनियर बनने की बधाई दी जा रही है। भले ही यह बधाई मजाक के रूप में दी गई हो, लेकिन यह घटना बहुत ही गंभीर सवाल खड़े करती है। ठेकेदार का सरकारी पद पर बैठकर फाइलों पर काम करना, एक संगठित भ्रष्टाचार की संभावना को उजागर करता है। मजाक के नाम पर हो रही इस गतिविधि ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
मनीष सोनी का जोन क्रमांक 7 में इतना प्रभुत्व केवल उसके ठेकेदार होने की वजह से नहीं है, बल्कि अधिकारियों से उसकी नजदीकियों की वजह से भी है। सरकारी कार्यों में किसी भी प्रकार का ठेकेदार हस्तक्षेप गैरकानूनी और अनैतिक है, लेकिन यहां तो अधिकारियों की मिलीभगत से यह आम होता जा रहा है। यह मिलीभगत न केवल अन्य ठेकेदारों को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि सरकारी धन का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा दे रही है।
इस तरह के भ्रष्टाचार का सीधा असर जनता और शहर के विकास पर पड़ता है। जब ठेकेदार और अधिकारी आपस में मिलीभगत कर काम करते हैं, तो कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि सार्वजनिक परियोजनाओं में देरी होती है, कार्यों की गुणवत्ता घटती है, और नागरिकों को खराब सेवाओं का सामना करना पड़ता है।
बिलासपुर नगर निगम के जोन क्रमांक 7 में ठेकेदार मनीष सोनी का इस तरह का हस्तक्षेप इस बात का संकेत है कि नगर निगम में प्रशासनिक सुधार की सख्त आवश्यकता है। ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच की इस मिलीभगत को रोकने के लिए कठोर कदम उठाने होंगे ताकि निगम के कार्यों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे।



