Thursday, March 26, 2026
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आय से अधिक संपत्ति मामले में सौम्या चौरसिया की अग्रिम जमानत याचिका खारिज: जानिए क्यों हुआ जमानत याचिका खारिज…

बिलासपुर में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव रह चुकी सौम्या चौरसिया की अग्रिम जमानत याचिका को हाईकोर्ट द्वारा खारिज कर दिया गया है। सौम्या चौरसिया, जो कि कोयला घोटाले के सिलसिले में पिछले दो वर्षों से जेल में बंद हैं, ने आय से अधिक संपत्ति मामले में अपनी संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए यह याचिका दायर की थी। हालाँकि, उनकी जमानत याचिका इसलिए खारिज कर दी गई क्योंकि उन्हें पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था।

सौम्या चौरसिया के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है। यह मामला उस समय सुर्खियों में आया जब जांच एजेंसियों ने उनके खिलाफ गहन जांच शुरू की और भारी मात्रा में संपत्तियों के दस्तावेज बरामद किए। इस जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चौरसिया की 50 से अधिक संपत्तियों को अटैच किया। यह संपत्तियां उनकी घोषित आय से कई गुना अधिक थीं, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो गया।

कोयला घोटाले में सौम्या चौरसिया की भूमिका पहले से ही सवालों के घेरे में थी। यह घोटाला छत्तीसगढ़ में कोयला खदानों से संबंधित था, जिसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। चौरसिया पर आरोप था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गैरकानूनी तरीके से संपत्ति अर्जित की। इस सिलसिले में उन्हें 2021 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वे जेल में हैं।

सौम्या चौरसिया ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। लेकिन, अदालत ने यह याचिका खारिज कर दी, क्योंकि उन्हें पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था। कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद अग्रिम जमानत की मांग निरर्थक है। यह निर्णय उनकी कानूनी मुश्किलों को और बढ़ा सकता है, क्योंकि इस मामले में कई और खुलासे होने की संभावना है।

ACB और EOW द्वारा किए गए जांच में पाया गया कि चौरसिया के पास बड़ी मात्रा में बेहिसाब संपत्ति है, जो उनकी आधिकारिक आय से मेल नहीं खाती। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी शामिल हो गया, जिसने आय से अधिक संपत्ति के मामले में और जांच की। जांच के दौरान ED ने उनकी 50 से अधिक संपत्तियों को अटैच किया, जिनकी कुल कीमत करोड़ों में आंकी गई है।

इस मामले के बढ़ते प्रभाव से यह स्पष्ट होता है कि राज्य में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करने वाली एजेंसियां किसी भी तरह का समझौता नहीं करने वाली हैं। सौम्या चौरसिया की गिरफ्तारी और संपत्तियों की अटैचमेंट भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाए गए एक बड़े कदम के रूप में देखी जा रही है। हालांकि, चौरसिया के पास अभी भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का विकल्प है, लेकिन मौजूदा हालातों को देखते हुए उनके लिए राहत मिलना मुश्किल दिख रहा है।

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