बिलासपुर जिले में कस्टम मिलिंग योजना के तहत खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान का उठाव स्थानीय मिलर्स द्वारा किया गया था। लेकिन समयसीमा समाप्त होने के बावजूद अभी भी जिले के चार प्रमुख मिलर्स द्वारा चावल का निर्धारित कोटा नागरिक आपूर्ति निगम में जमा नहीं कराया गया है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए बिलासपुर के कलेक्टर अवनीश शरण ने सख्त कार्रवाई का संकेत दिया है।
कलेक्टर ने उन मिलर्स को नोटिस जारी करते हुए 30 नवंबर 2024 तक का समय दिया है, जिसके भीतर उन्हें शत-प्रतिशत चावल जमा करना होगा। अगर इस समय सीमा के भीतर चावल जमा नहीं किया गया, तो प्रशासन उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा। इस कार्रवाई के तहत उनकी बैंक गारंटी जब्त की जा सकती है, जो उन्होंने शासकीय धान उठाव के लिए जमा की थी।
शासन द्वारा कस्टम मिलिंग योजना के तहत अनुबंध के अनुसार 100% चावल जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन जिले के चार मिलर्स, जिनमें श्याम जी राइस इंडस्ट्रीज मोहतराई, सरदार एग्रो इंडस्ट्रीज, एस.डी. एग्रो फूड प्रोडक्ट, और जेठू बाबा इंडस्ट्रीज बहतराई शामिल हैं, अभी तक अपने हिस्से का चावल जमा करने में विफल रहे हैं।
कलेक्टर द्वारा जारी किए गए नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि अगर मिलर्स द्वारा निर्धारित समयावधि तक चावल जमा नहीं किया गया, तो उनकी बैंक गारंटी जब्त की जाएगी और इसके अलावा कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
कस्टम मिलिंग योजना के तहत शासन ने मिलर्स को धान उठाव की अनुमति दी थी, जिसके बदले उन्हें निर्धारित समय पर चावल जमा करना अनिवार्य है। लेकिन अब तक इस प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई है, जिससे शासन और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। चावल जमा करने में हो रही देरी से सरकारी भंडारों में अनाज की कमी हो सकती है, जिससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर भी असर पड़ सकता है।
कलेक्टर अवनीश शरण द्वारा लिया गया यह कड़ा रुख प्रशासनिक तत्परता को दर्शाता है। शासन की स्पष्ट नीति है कि सार्वजनिक धन और संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाए, और जो भी इसमें चूक करता है, उसे सख्त परिणाम भुगतने होंगे।
बिलासपुर जिले में कस्टम मिलिंग योजना के तहत धान उठाने वाले मिलर्स के सामने प्रशासन द्वारा निर्धारित 30 नवंबर की समयसीमा महत्वपूर्ण है। यह देखना बाकी है कि मिलर्स प्रशासन की इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेते हैं। अगर समय पर चावल जमा नहीं किया गया, तो उन्हें न केवल बैंक गारंटी खोनी पड़ेगी, बल्कि आगे की कानूनी कार्यवाही का भी सामना करना पड़ सकता है।


