Saturday, March 14, 2026
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बिलासपुर के मस्तुरी पाराघाट के सरपंच प्रदीप सोनी बर्खास्त: जिलाबदर की भी चुकी है कार्रवाई, छह साल तक चुनाव लड़ने पर रोक…

बिलासपुर, 31 दिसंबर 2024। मस्तुरी विकासखंड के ग्राम पाराघाट के सरपंच प्रदीप सोनी को गंभीर अनियमितताओं और अपराधों में संलिप्तता के आरोप सिद्ध होने पर उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई एसडीएम मस्तूरी ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 40 के तहत की है। सरपंच पर शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा, गुंडागर्दी, और लोगों को आतंकित करने के आरोप साबित हुए हैं। इसके अतिरिक्त, उन्हें आगामी 6 वर्षों तक किसी भी चुनाव में भाग लेने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया है।

क्या हैं आरोप?
प्रदीप सोनी पर आरोप है कि उन्होंने ग्राम पाराघाट की शासकीय भूमि, विशेष रूप से खसरा नंबर 525/1 और अन्य भूमि पर अवैध कब्जा करवा दिया। आरोपों के मुताबिक, सरपंच ने लगभग 30-35 एकड़ शासकीय भूमि पर फ्लाई ऐश भराई करवाकर चारागाह भूमि को समाप्त कर दिया। इस भूमि को आबादी भूमि (खसरा नंबर 525/3) बताकर पट्टे बांटे गए। साथ ही, उन्होंने गोचर भूमि पर भी निर्माण कार्य की अनुमति दी।

ग्रामवासियों और शिकायतकर्ताओं ने सरपंच पर शासकीय भूमि पर कब्जा करने और दबाव बनाकर जमीन खाली कराने के गंभीर आरोप लगाए। शिकायतकर्ता छहोरन वस्त्रकार ने बताया कि उनकी 45 वर्षों पुरानी जमीन को गोचर भूमि बताते हुए कब्जे से हटा दिया गया।

जांच में खुलासा
तहसीलदार मस्तूरी की जांच और ग्रामवासियों के बयान के आधार पर, यह साबित हुआ कि सरपंच ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए शासकीय भूमि पर कब्जा कर निर्माण कार्य करवाए। इस संबंध में, जांच प्रतिवेदन और जिला दंडाधिकारी द्वारा जारी आदेश ने यह स्पष्ट किया कि प्रदीप सोनी पिछले कई वर्षों से अपराधों में लिप्त थे।

अपराधों का इतिहास
साल 2015 से ही सरपंच प्रदीप सोनी पर मारपीट, धमकी, गाली-गलौच, और गुंडागर्दी जैसे गंभीर अपराधों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं। उनके खिलाफ छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम 1992 की धारा (5)(क)(ख) के तहत जिला बदर की कार्रवाई भी की जा चुकी है। कलेक्टर ने उन्हें छह महीने के लिए जिले से निष्कासित करने का आदेश जारी किया था।

बर्खास्तगी के आदेश और प्रतिबंध
एसडीएम मस्तूरी ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 40(1)(क)(ख) का उल्लंघन सिद्ध होने पर प्रदीप सोनी को उनके पद से हटा दिया। इसके साथ ही, धारा 40(2) के तहत उन्हें 6 साल तक चुनाव लड़ने से भी अयोग्य ठहराया गया है। आदेश में यह कहा गया कि उनके कृत्य जनहित और प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ हैं।

जनप्रतिनिधियों के लिए संदेश
यह मामला इस बात का उदाहरण है कि जनप्रतिनिधियों को अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। शासकीय भूमि का संरक्षण और समाज की भलाई में काम करना उनकी जिम्मेदारी है। प्रदीप सोनी की बर्खास्तगी यह संदेश देती है कि कानून के सामने कोई भी दोषी बच नहीं सकता।

यह कार्रवाई शासन की निष्पक्षता और ग्रामीण प्रशासन की पारदर्शिता को बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण कदम है।

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