जांजगीर–चांपा ज़िले से एक बेहद दर्दनाक और दिल को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। हसदेव नदी में नहाने गए तीन मासूम दोस्तों की डूबकर मौत हो गई। यह हादसा उस वक़्त हुआ जब स्कूल की छुट्टी होने पर तीनों बच्चे सुबह करीब 10 बजे साइकिल से हनुमानधारा की तरफ नहाने निकले थे, लेकिन वापस घर नहीं लौट सके। शाम तक जब तीनों का कोई पता नहीं चला तो परिवारवालों की बेचैनी बढ़ गई और तलाश शुरू हुई।
परिवारजनों की सूचना पर पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर खोज शुरू की। हनुमानधारा के पास नदी किनारे बच्चों के कपड़े, साइकिल, मोबाइल और चप्पल पड़े मिले, जिसके बाद अनहोनी की आशंका और गहरी हो गई।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, रेस्क्यू टीम और DDRF मौके पर पहुंची। बिलासपुर से SDRF की विशेष टीम भी बुलाई गई। अंधेरा होने के चलते तलाशी अभियान रात में रोका गया और अगली सुबह फिर से शुरू किया गया। करीब 26 घंटे की लगातार खोजबीन के बाद गुरुवार सुबह तीनों छात्रों के शव नदी से बरामद कर लिए गए।
- नेल्सन लकड़ा (15) — इनके पिता नज़रियूस एक्का सक्ती ज़िले में ASI पद पर पदस्थ हैं।
- युवराज राठौर (14) — पिता दिनेश राठौर एक प्लांट में कर्मचारी हैं।
- रुद्र सिंह राज (11) — पिता जयचंद राज किराना दुकान चलाते हैं।
तीनों की दर्दनाक मौत ने पूरे इलाक़े को ग़मगीन कर दिया है। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।
हादसे की ख़बर मिलते ही घरों में मातम पसर गया। मां–बाप का रो–रोकर बुरा हाल है। किसी को यक़ीन नहीं हो रहा कि सुबह खेलते–कूदते निकले उनके बच्चे अब कभी लौटकर नहीं आएंगे।
स्थानीय प्रशासन ने परिवारों को पूरी मदद का भरोसा दिलाया है। इस हादसे ने पूरे जिले में गहरी शोक की लहर पैदा कर दी है और लोगों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता भी बढ़ा दी है।
समाज के कई जिम्मेदार लोग इस बात पर भी चिंता जता रहे हैं कि हसदेव नदी के कई इलाकों में गहराई और तेज बहाव को लेकर पर्याप्त सुरक्षा इंतज़ाम नहीं हैं। इस हादसे ने एक बार फिर चेतावनी दे दी है कि छुट्टी के दिनों में बच्चों की निगरानी और सतर्कता बेहद ज़रूरी है।


