Tuesday, May 5, 2026
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बिलासपुर में भाजपा की जीत का जश्न: आतिशबाजी, मिष्ठान वितरण और ‘झालमुड़ी’ के साथ कार्यकर्ताओं ने मनाई खुशी…

बिलासपुर। भारतीय जनता पार्टी की विभिन्न राज्यों में मिली जोरदार जीत, विशेषकर पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक प्रदर्शन, का उत्साह अब छत्तीसगढ़ तक दिखाई देने लगा है। बिलासपुर शहर में भी भाजपा कार्यकर्ताओं और बंगाली समाज के लोगों ने इस जीत को उत्सव के रूप में मनाया। रेलवे मंडल क्षेत्र के विद्या विनोबा नगर में आयोजित इस कार्यक्रम में उत्साह, जोश और राजनीतिक ऊर्जा का अनोखा संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल चुनाव में पार्टी के संघर्ष और जीत को याद करते हुए वहां के मेहनती और निडर कार्यकर्ताओं को नमन किया। वक्ताओं ने कहा कि बंगाल में कठिन परिस्थितियों और भय के माहौल के बावजूद कार्यकर्ताओं ने जिस साहस और समर्पण के साथ काम किया, वह इस जीत की असली ताकत है। जनता का समर्थन और कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत ने भाजपा को मजबूत परिणाम दिलाया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार के दौरान ‘झालमुड़ी’ खाने की चर्चा भी प्रमुख रूप से हुई। इसे एक प्रतीक के रूप में देखा गया, जिसने चुनाव प्रचार को आम जनता से जोड़ने का काम किया। इसी प्रेरणा से बिलासपुर में भी स्थानीय कार्यकर्ताओं ने विशेष रूप से झालमुड़ी बनाकर लोगों में वितरित की और जीत की खुशी साझा की।

गायत्री मंदिर, विनोबा नगर मुख्य मार्ग पर आयोजित इस कार्यक्रम में जमकर आतिशबाजी की गई और मिठाइयां बांटी गईं। माहौल पूरी तरह उत्सवमय हो गया, जहां कार्यकर्ता, व्यापारी वर्ग, महिलाएं और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए।

कार्यक्रम में भाजपा के कई प्रमुख स्थानीय नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिनमें किशोर राय, मनीष अग्रवाल, वीरेंद्र केसरवानी, जुगल अग्रवाल, गणेश रजक, मनजीत गोस्वामी, रिंकू मित्र, नितिन बेरीवाल, मनोज अग्रवाल, सत्यजीत भौमिक, राम साहू, परेश श्रीवास्तव, सचिन राव, केदार खत्री, हरिन तिवारी, अमित राठी, कमलेश राजपूत, आलोक रंजन पांडे, सुब्रत बनर्जी, जीवन घोष, लीना बनर्जी, सीमा सेन गुप्ता, वरुण दास और अन्य कई कार्यकर्ता व नागरिक शामिल रहे।

समारोह ने यह संदेश दिया कि राजनीतिक जीत केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह कार्यकर्ताओं के समर्पण, जनता के विश्वास और सामाजिक जुड़ाव का परिणाम होती है। बिलासपुर में मनाया गया यह जश्न उसी जनभावना का प्रतिबिंब रहा, जिसमें उत्साह के साथ-साथ राजनीतिक प्रतिबद्धता भी स्पष्ट रूप से नजर आई।

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