बिलासपुर में एक दिवसीय प्रवास पर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान केंद्र सरकार, भाजपा, आरएसएस और कथावाचकों पर तीखे राजनीतिक और धार्मिक सवाल दागते हुए माहौल गरमा दिया। अपने आक्रामक अंदाज में उन्होंने साफ कहा कि देश की जनता महंगाई, अपराध और अव्यवस्था से परेशान है, जबकि सत्ता “मेलोडी” बनाने में व्यस्त है।
रामभद्राचार्य को लेकर पूछे गए सवाल पर भूपेश बघेल ने सीधे केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि संत-महात्मा समाज को दिशा देने का काम करते हैं, लोग उनसे जीवन की समस्याओं का समाधान पूछते हैं, लेकिन यदि कोई खुद को रामभक्त और गौभक्त कहता है तो उसे यह भी बताना चाहिए कि केंद्र सरकार में ऐसे लोग क्यों बैठे हैं जो खुले तौर पर गोमांस भक्षण करते हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू और पूर्वोत्तर के नेताओं का उदाहरण देते हुए भाजपा की कथित “दोहरी नीति” पर हमला बोला।
अयोध्या राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का मुद्दा उठाते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि भगवान राम ने स्वयं लंका प्रस्थान से पहले माता सीता की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की थी, लेकिन अयोध्या में हुए आयोजन में शंकराचार्यों को उचित सम्मान तक नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक परंपराओं को दरकिनार कर कुछ लोग स्वयंभू धर्मगुरु बनने की कोशिश कर रहे हैं।
आरएसएस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि संघ आज खुद को हिंदू धर्म का सबसे बड़ा ठेकेदार समझने लगा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कभी किसी धार्मिक मंच पर वेद, उपनिषद या संस्कृत श्लोकों पर चर्चा की है? फिर हिंदू धर्म की “ठेकेदारी” किस आधार पर की जा रही है?
कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री पर कटाक्ष करते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि जो लोग पर्ची देखकर भविष्य बता देते हैं, वे जनता को यह भी बताएं कि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम आखिर कब कम होंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश की जनता महंगाई से परेशान है, लेकिन समाधान कहीं दिखाई नहीं दे रहा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि देश को यह जानने का अधिकार है कि भारत की नीतियां दिल्ली तय कर रही हैं या वॉशिंगटन। रूस से तेल खरीदने जैसे मुद्दों पर अमेरिका के दबाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जनता महंगाई की आग में झुलस रही है और सरकार सिर्फ भाषणों में व्यस्त है।
प्रदेश की कानून व्यवस्था पर हमला बोलते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कवर्धा, कुनकुरी और मरवाही की घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी महिलाओं के साथ अत्याचार, व्यापारी की दिनदहाड़े हत्या और लगातार बढ़ते अपराध यह साबित करते हैं कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। उन्होंने कहा कि यदि यही “सुशासन” है तो फिर प्रदेश को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।
सरगुजा में कांग्रेस नेताओं के आंदोलन और आमरण अनशन को लेकर भी उन्होंने भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस राजनीतिक दबाव में काम कर रही है और बिना किसी ठोस आधार के गंभीर धाराएं जोड़ रही है। बिश्रामपुर समेत कई इलाकों में तनाव की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में प्रशासनिक अराजकता अपने चरम पर पहुंच चुकी है।
ठाकरो जनता पार्टी को मिल रहे समर्थन पर उन्होंने कहा कि वे कांग्रेस में हैं और किसी दूसरी पार्टी को समर्थन देने का सवाल ही नहीं उठता, लेकिन यदि कोई नई राजनीतिक पहल कुछ ही दिनों में करोड़ों युवाओं का समर्थन हासिल कर रही है तो यह मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ जनता के गुस्से का संकेत है। उन्होंने कहा कि अब युवा सवाल पूछ रहा है और सत्ता के पास जवाब नहीं है।
इटली दौरे और जॉर्जिया मेलोनी से प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात पर भी उन्होंने व्यंग्य किया। उन्होंने कहा कि “मेलोनी का मेल और मोदी का डी मिलकर मेलोडी बन गया है।” इस टिप्पणी के साथ उन्होंने केंद्र सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि आम जनता को खर्च कम करने की सलाह दी जा रही है, जबकि सत्ता और उद्योगपति विदेशों में अरबों रुपये खर्च कर रहे हैं।
भूपेश बघेल की इस प्रेस वार्ता ने साफ कर दिया कि आने वाले दिनों में कांग्रेस भाजपा सरकार और केंद्र की नीतियों पर और अधिक आक्रामक रुख अपनाने वाली है। धार्मिक मुद्दों से लेकर महंगाई, विदेश नीति और कानून व्यवस्था तक, पूर्व मुख्यमंत्री ने लगभग हर मोर्चे पर सत्ता पक्ष को घेरने की कोशिश की।


