बिलासपुर। खरीफ सीजन की दस्तक के साथ ही किसानों के मुद्दे एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। खाद, बीज, यूरिया, कृषि ऋण और बिजली संकट को लेकर बिलासपुर में कांग्रेस ने बड़ा शक्ति प्रदर्शन करते हुए जिला कलेक्ट्रेट का घेराव किया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को राहत देने के बजाय ऐसे फैसले थोप रही है, जिनसे खेती करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) और किसान कांग्रेस के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में विधायक, जिला अध्यक्ष, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, पूर्व महापौर, पार्षद, महिला कांग्रेस, युवक कांग्रेस और एनएसयूआई सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान किसानों से जुड़े मुद्दों पर राज्य सरकार को घेरते हुए 9 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।

कांग्रेस का सबसे बड़ा हमला सरकार की खाद वितरण नीति पर रहा। पार्टी नेताओं ने प्रति एकड़ केवल एक बोरी खाद देने की पात्रता तय करने के फैसले को किसानों के साथ अन्याय बताया। उनका तर्क है कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में मिट्टी, फसल और उत्पादन क्षमता अलग-अलग है, ऐसे में एक समान फार्मूला लागू करना खेती की वास्तविक जरूरतों के खिलाफ है। कांग्रेस ने इसे “किसान विरोधी निर्णय” बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की।
खाद वितरण को लेकर दूसरा बड़ा सवाल पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों को तीन किश्तों में खाद देने की व्यवस्था पर उठाया गया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि किसान खेत में काम करे या फिर बार-बार सोसायटियों के चक्कर लगाए। खेती के सबसे महत्वपूर्ण समय में ऐसी व्यवस्था किसानों के लिए परेशानी बढ़ाने वाली साबित हो रही है।
खाद संकट के साथ-साथ डीजल और बिजली का मुद्दा भी आंदोलन का प्रमुख केंद्र रहा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में डीजल की उपलब्धता सीमित कर दी गई है और जरीकन में डीजल देने पर प्रतिबंध ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों के संचालन के लिए किसान पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं, जिससे बुआई और खेतों की तैयारी प्रभावित हो रही है।
बिजली व्यवस्था को लेकर भी सरकार कटघरे में रही। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि एक ओर कृषि बिजली की दरों में वृद्धि हो रही है, दूसरी ओर लगातार कटौती से सिंचाई व्यवस्था चरमरा गई है। खेतों तक पर्याप्त बिजली नहीं पहुंचने से फसल उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ रहा है। कांग्रेस ने कृषि पंपों के लिए मुफ्त और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।
प्रदर्शन के दौरान खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया गया। कांग्रेस का आरोप है कि सहकारी व्यवस्था में खाद की कमी के बीच निजी दुकानों में ऊंचे दामों पर खाद बेची जा रही है। यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो खरीफ सीजन में किसान गंभीर संकट का सामना करेंगे।
किसानों की आर्थिक स्थिति को लेकर कांग्रेस ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण सीमा बढ़ाने की मांग भी रखी। संगठन का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन ऋण सीमा पुरानी व्यवस्था के अनुसार बनी हुई है। ऐसे में प्रति एकड़ न्यूनतम 40 हजार रुपये ऋण उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि किसान महंगे बीज, खाद और कृषि उपकरणों की व्यवस्था कर सकें।
धान खरीदी के भुगतान को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा। नेताओं ने कहा कि किसानों को बोनस और समर्थन मूल्य की अंतर राशि सहित पूरा भुगतान एकमुश्त किया जाना चाहिए। भुगतान में देरी का सीधा असर किसानों की अगली फसल की तैयारी और उनके घरेलू खर्चों पर पड़ता है।
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो कांग्रेस ने किसानों के मुद्दों को लेकर एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाया है। खाद, बिजली, डीजल और धान भुगतान जैसे मुद्दे सीधे ग्रामीण मतदाताओं और कृषि अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं। ऐसे में बिलासपुर से उठी यह आवाज केवल एक जिला स्तरीय प्रदर्शन नहीं, बल्कि प्रदेश सरकार के खिलाफ किसानों के असंतोष को राजनीतिक मुद्दा बनाने की रणनीति के रूप में भी देखी जा रही है।
खरीफ सीजन की शुरुआत से ठीक पहले हुए इस प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में किसानों के सवालों पर सियासत और तेज होगी। अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर हैं—क्या किसानों की मांगों पर राहत मिलेगी या फिर यह आंदोलन प्रदेशव्यापी अभियान का रूप लेगा।


