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लूतरा शरीफ दरगाह कमेटी के अध्यक्ष बने इकबाल हक, इरशाद अली को संरक्षक की मिली जिम्मेदारी, सेक्रेटरी पद पर रियाज अशरफी दूसरी बार…

रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक एवं आध्यात्मिक केंद्र लूतरा शरीफ दरगाह में इस बार एक ऐसा निर्णय लिया गया है, जिसने न केवल दरगाह से जुड़े लोगों का ध्यान आकर्षित किया है बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि बेहतर काम और पारदर्शी व्यवस्थाओं का सम्मान किया जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने दरगाह की संचालन समिति में बदलाव करते हुए नई कार्यकारिणी का गठन किया है, लेकिन खास बात यह रही कि इस बार पूरी समिति को भंग नहीं किया गया। बल्कि पिछले ढाई वर्षों में किए गए कार्यों और उपलब्धियों को देखते हुए अधिकांश पदाधिकारियों एवं सदस्यों को यथावत रखते हुए समिति का विस्तार किया गया है।

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सलीम राज की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में समिति की सदस्य संख्या 11 से बढ़ाकर 20 करने का निर्णय लिया गया। यह फैसला दरगाह परिसर में हुए विकास कार्यों, बेहतर प्रबंधन और श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराई गई सुविधाओं के आधार पर लिया गया। बोर्ड ने माना कि वर्तमान समिति ने सीमित संसाधनों में भी उल्लेखनीय कार्य किए हैं और दरगाह की व्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

नई कार्यकारिणी में हाजी मोहम्मद इकबाल हक को अध्यक्ष बनाया गया है। मोहम्मद सिराज और रोशन खान को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। रियाज अशरफी को लगातार दूसरी बार सचिव पद की जिम्मेदारी मिली है, जो उनके कार्यों पर बोर्ड के भरोसे को दर्शाता है। फैजान अहमद (शिबू) को कोषाध्यक्ष तथा जावेद रब्बानी को उप-कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

दरगाह के विकास की बात करें तो वर्तमान समिति ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की नींव रखी है। शासन और प्रशासन के सहयोग से लगभग 11 करोड़ रुपये के विकास प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। वहीं एनटीपीसी के सहयोग से लगभग 56 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक शौचालय निर्माण की प्रक्रिया टेंडर स्तर तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा जर्जर बाउंड्री वॉल के पुनर्निर्माण, पर्यटन मंडल की सहायता से लगभग 30 लाख रुपये की लागत वाले सामुदायिक भवन के निर्माण, परिसर की व्यवस्थाओं में सुधार और मदरसे में व्यापक बदलाव जैसे कई कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किए गए हैं।

समिति की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह भी रही कि उसने दरगाह परिसर को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखते हुए केवल धार्मिक, सामाजिक और जनसुविधा संबंधी कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया। परिणामस्वरूप दूर-दराज से आने वाले जायरीन को बेहतर सुविधाएं और व्यवस्थित वातावरण मिला। इससे लूतरा शरीफ की पहचान केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रही, बल्कि अन्य राज्यों और क्षेत्रों तक भी पहुंची है।

स्थानीय मुस्लिम जमात, ग्राम पंचायत, व्यापारी संघ और क्षेत्र के नागरिकों ने भी समिति के कार्यों पर संतोष व्यक्त किया है। यही वजह है कि वक्फ बोर्ड ने नई टीम बनाने के बजाय पुरानी टीम के अनुभव और कार्यशैली पर भरोसा जताते हुए उसका विस्तार करने का निर्णय लिया।

नई कार्यकारिणी के गठन के बाद क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं में नई उम्मीद जगी है। लोगों को विश्वास है कि समिति विकास कार्यों की गति को और तेज करेगी, दरगाह, मस्जिद और मदरसे की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाएगी तथा श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नए प्रयास करेगी।

लूतरा शरीफ में यह बदलाव केवल पदों का फेरबदल नहीं है, बल्कि यह उन कार्यों की स्वीकृति है जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में दरगाह को विकास, व्यवस्था और विश्वास का नया केंद्र बनाया है। अब सबकी निगाहें नई कार्यकारिणी पर हैं, जिससे उम्मीद की जा रही है कि वह लूतरा शरीफ को धार्मिक पर्यटन और सामाजिक विकास के नए आयाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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