छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़: आंदोलन की राह पर प्रदेश के 5 लाख सरकारी कर्मचारी, 34% DA और HRA की मांग, 96 कर्मचारी संघों का हल्लाबोल…

केंद्र सरकार के समान महंगाई भत्ता (DA) और गृह भाड़ा भत्ता (HRA) बढ़ाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारी आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं। हड़ताल की वजह से स्कूलों में पढ़ाई, राजस्व मामलों के निपटारे से लेकर सामान्य सरकारी कामकाज ठप हो जाने का खतरा मंडरा रहा है। लगभग 5 लाख कर्मचारियों के हड़ताल से आम जनता की परेशानी बढ़नी तय है। हड़ताल को 96 कर्मचारी-अधिकारी संगठन शामिलि होने की बात कही जा रही है। इधर आंदोलन को लेकर सरकार भी सख्ती के मूड में है। जिलों कलेक्टरों को वैकल्पिक व्यवस्था से कामकाज जारी रखने को कहा गया है। हड़ताल में पहली बार पहली बार न्यायिक कर्मचारी भी शामिल हो रहे हैं।

बता दें कि राज्य सरकार ने 6% महंगाई भत्ता बढ़ाए जाने का आदेश जारी किया गया है, लेकिन इस आदेश को लेकर कर्मचारी और अधिकारियों में भारी नाराजगी है। प्रदेश में कर्मचारी संगठनों का कहना है कि महंगाई भत्ता 12% बढ़ाए जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया था। केंद्र सरकार के सामान महंगाई भत्ता की मांग की गई थी, लेकिन सरकार ने 6% महंगाई भत्ता बढ़ाया है, जिससे कर्मचारियों के हक पर डाका डाला जा रहा है। कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन 3 चरणों में आंदोलन कर चुका है। अब फिर एक बार महंगाई भत्ता और गृह भाड़ा भत्ता को लेकर 22 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर्मचारी संगठनों ने किया है। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से एक बार फिर आम जनता की मुसीबत बढ़ने वाली है।

फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा, वन राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश मिश्रा, प्रांताध्यक्ष आरके रिछारिया, बीपी शर्मा, राजेश चटर्जी, अजय तिवारी, चंद्रशेखर तिवारी, संजय सिंह एवं रोहित तिवारी ने संयुक्त रूप से कहा कि फेडरेशन का आंदोलन केंद्र के समान 34% डीए तथा सातवें वेतन में एचआरए के लिए था। 30 मई को फेडरेशन द्वारा मुख्य सचिव को जिला कलेक्टर एवं तहसीलदार के माध्यम से 4 चरणों में आंदोलन करने का नोटिस दिया गया था। 29 जून को पूरे प्रदेश के अधिकारी एवं कर्मचारी एक दिन के सामूहिक अवकाश पर रहे, लेकिन शासन द्वारा सकारात्मक पहल नहीं की गई। इसके बाद 25 से 29 जुलाई तक 5 दिनों का निश्चितकालीन आंदोलन किया गया। हड़ताल के सूचना के बाद सामान्य प्रशासन द्वारा चर्चा के लिए 2 बार फेडरेशन को बुलाया गया था।

केंद्र सरकार के सामान DA और HRA चाहिए

फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने कर्मचारियों का पक्ष सचिव स्तर के अधिकारियों के समक्ष सुझाव सहित रखा था। मांगों पर सहमति जताते हुए अफसरों ने सीएम भूपेश बघेल से अंतिम चर्चा कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन साजिशपूर्ण तरीके से कर्मचारियों के हड़ताल को तोड़ने चक्रव्यूह बनाकर 6% डीए कर्मचारियों को देने का प्लान बनाया गया। शिखंडी की आड़ में कर्मचारियों के मुद्दों का वध किया गया है। कमल वर्मा ने बताया कि केंद्र के समान 34% मंहगाई भत्ता एवं सातवें वेतन में गृहभाड़ा भत्ता की घोषणा नहीं किए जाने के कारण फेडरेशन की आपात बैठक में 22 अगस्त से अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया। शासन द्वारा 6% मंहगाई भत्ता का आदेश जारी किया गया है, जो कर्मचारियों की अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। सातवें वेतन पर गृहभाड़ा भत्ता का आदेश जारी नहीं होने कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।

फेडरेशन के आंदोलन के बाद 2 बार बढ़ा DA

फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा ने बताया कि राज्य सरकार ने 1 जुलाई 2019 के लंबित मंहगाई भत्ते की 5% किस्त को 1 जुलाई 2021 से स्वीकृत कर कुल 17% किया था, जिसमें देय तिथि 1 जुलाई 2019 से लेकर 30 जून 2021 तक के वेतन में अंतर की राशि का भुगतान नहीं किया था। सरकार ने फेडरेशन के आंदोलन के बाद 1 मई को डीए में 5% की वृद्धि की थी। कर्मचारियों को 1 जुलाई 2021 से 30 अप्रैल 2022 तक 17% डीए पर वेतन बना था, लेकिन सरकार ने वेतन में अंतर की राशि का भुगतान फिर नहीं किया। सरकार ने डीए में 6% की वृद्धि 1 अगस्त 2022 से कर 28% किया है, जबकि केंद्र में 28% डीए का देय तिथि 1 जुलाई 2021 है। राज्य सरकार ने अपनी छल करते हुए देय तिथि से डीए स्वीकृत नहीं किया है।

वेतन काटने के आदेश की जलाई थी प्रतियां

बता दें कि राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश में अपनी मांगों को लेकर कर्मचारी और अधिकारियों ने 25 जुलाई से 29 जुलाई तक 5 दिनों तक हड़ताल किया था। हड़ताल पर चले जाने से समस्त विभागों में कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया था। ऐसे में प्रदेश सरकार ने हड़ताल के पांचवें और अंतिम दिन हड़ताली कर्मियों का वेतन काटने और ब्रेक इन सर्विस का आदेश जारी कर दिया, जिसके बाद से प्रदेशभर के कर्मचारियों में आक्रोश है। कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने प्रदेश स्तर पर बैठक कर वेतन काटे जाने का विरोध जताते हुए शासन के आदेश की प्रतियां भी जलाई थी। बता दें कि छत्तीसगढ़ के कर्मचारी संगठन केंद्र के समान 34% महंगाई भत्ता और सातवें वेतनमान के आधार पर गृह भाड़ा (एचआरए) भत्ता की मांग कर रहे हैं।