बिलासपुर, यदुनंदन नगर क्षेत्र में हाल ही में एक बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। ‘मास्टर चैट आई’ नामक एक मोबाइल ऐप के माध्यम से लोगों को करोड़ों रुपए की ठगी का शिकार बनाया गया। इस घोटाले का मुख्य आरोपी मिर्जा बशीर बेग है, जो पेशे से एक सामान्य अंडा भजिया की दुकान चलाता है। उसने अपने मोबाइल ऐप से बड़े रिटर्न का लालच देकर सैकड़ों लोगों को ठग लिया।
मिर्जा बशीर बेग ने ‘मास्टर चैट आई’ नामक एक मोबाइल ऐप के जरिए लोगों को आकर्षक निवेश योजनाओं का लालच दिया। स्कीम के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति इस ऐप में ₹680 का निवेश करता, तो उसे हर दिन ₹24 का रिटर्न मिलता। बड़ी राशि के निवेश पर और भी अधिक मुनाफा देने का वादा किया गया था। उदाहरण के लिए, ₹3 लाख का निवेश करने पर प्रतिदिन ₹35,000 तक का मुनाफा देने का झांसा दिया गया था।
शुरुआत में, ऐप ने निवेशकों को नियमित रूप से पैसा दिया, जिससे लोगों को इस स्कीम पर भरोसा हो गया। व्हाट्सएप और मोबाइल लिंक के जरिए इस ऐप का प्रचार जोर-शोर से किया गया, जिससे बड़ी संख्या में लोग इसमें निवेश करने लगे।

मोहम्मद आमिल नामक एक पीड़ित के अनुसार, मिर्जा बशीर बेग ने बिलासपुर के रायपुर रोड स्थित एक होटल में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें सैकड़ों लोगों को आमंत्रित किया गया। इस आयोजन में बड़ी नकदी टेबल पर सजा कर निवेशकों को रिटर्न का सबूत दिखाया गया। इसके अलावा, जो लोग ऐप डाउनलोड कर चुके थे, उन्हें 1000 रुपए का कैश उपहार स्वरूप दिया गया।
इस आयोजन का उद्देश्य लोगों में ऐप के प्रति विश्वास पैदा करना था। बड़े पैमाने पर निवेशकों को लालच देने के बाद, ऐप ने कुछ समय तक सही ढंग से भुगतान किया। इससे लोगों ने और अधिक निवेश करना शुरू कर दिया।
लगभग सात महीने तक ‘मास्टर चैट आई’ ऐप के जरिए निवेशकों को नियमित रूप से रिटर्न मिलता रहा। इस दौरान लोगों ने छोटे निवेश से शुरुआत की, लेकिन जैसे-जैसे उन्हें भरोसा हुआ, उन्होंने बड़ी रकम लगानी शुरू कर दी। फिर अचानक एक दिन, यह ऐप बंद हो गया और कंपनी का कोई अता-पता नहीं रहा। इससे निवेशकों में हड़कंप मच गया। अनुमान के मुताबिक, यह ठगी करोड़ों रुपए की है। ठगे गए अधिकांश लोग यदुनंदन नगर और तिफरा क्षेत्र के निवासी हैं।
घोटाले के आरोपों का सामना कर रहे मिर्जा बशीर बेग ने इस मामले में खुद को निर्दोष बताया है। उनका कहना है कि वह भी इस घोटाले का शिकार हुआ है और सिर्फ कंपनी के कहने पर वीडियो बनाकर लोगों को स्कीम के बारे में बताया। हालांकि, इस दावे पर अधिकांश लोग विश्वास नहीं कर रहे हैं। अधिकतर पीड़ित उसे इस घोटाले का मास्टरमाइंड मान रहे हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सात महीने तक यह घोटाला चलता रहा और किसी भी सरकारी एजेंसी या प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं लगी। अब ठगी के शिकार हुए लोग पुलिस में शिकायत दर्ज करने की तैयारी कर रहे हैं और जल्द ही ठगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मोहम्मद आमिल समेत अन्य पीड़ितों ने पुलिस से त्वरित जांच की अपील की है।
यह घटना बिलासपुर के लोगों के लिए एक कड़ा सबक है कि किसी भी निवेश योजना में बिना पूरी जानकारी और जांच-पड़ताल के पैसा लगाना कितना जोखिम भरा हो सकता है। इस घोटाले ने दिखाया कि कैसे लोग बड़ी कमाई के लालच में बिना सोचे-समझे अपनी मेहनत की कमाई गंवा सकते हैं।
बिलासपुर के इस ठगी कांड ने दिखाया कि कैसे छोटी-छोटी जगहों पर भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बड़े घोटाले किए जा सकते हैं। यह घटना हमें सतर्क रहने और किसी भी निवेश या स्कीम में शामिल होने से पहले पूरी तरह से जांच करने का संदेश देती है। सरकारी एजेंसियों को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की गतिविधियों की निगरानी करनी चाहिए ताकि इस तरह के घोटाले भविष्य में रोके जा सकें।


