रायपुर। संचालक, संचालनालय स्वास्थ्य सेवाओं (Directorate of Health Services) के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर एक बड़ी कार्रवाई देखने को मिली। हेल्थ केयर डिवाइस बनाने वाली कंपनी की याचिका पर नया रायपुर स्थित कार्यालय में कुर्की की कार्रवाई की गई। यह कदम स्वास्थ्य विभाग द्वारा लाखों रुपये के उपकरणों का भुगतान न करने पर उठाया गया, जो कंपनी से खरीद किए गए थे।
हेल्थ केयर डिवाइस कंपनी ने विभाग पर आरोप लगाया था कि उसने महंगे और महत्वपूर्ण उपकरण तो प्राप्त कर लिए, लेकिन लंबे समय तक भुगतान नहीं किया। इसके बाद, कंपनी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए विभाग के खिलाफ कुर्की का आदेश जारी किया।
अदालत की स्पेशल मचकुरी टीम और कंपनी के वकील कुर्की की कार्रवाई के लिए नया रायपुर स्थित संचालनालय पहुंचे। टीम ने सरकारी कार्यालय के अधिकारियों को रोका और आदेश दिया कि वे अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए वाहन छोड़कर कार्यालय से बाहर न जाएं।

अदालत के आदेश के तहत संपत्ति कुर्क करने की तैयारी की गई। टीम ने विभागीय संपत्ति की सूची तैयार की और उसे कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की। इस दौरान हेल्थ केयर कंपनी के वकील भी मौजूद थे, जो कार्रवाई को लेकर पूरी निगरानी रख रहे थे।
हेल्थ केयर डिवाइस निर्माता कंपनी का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग ने उनके उपकरणों का इस्तेमाल किया, लेकिन भुगतान को बार-बार टालते रहे। कंपनी के वकील ने कोर्ट को बताया कि विभाग की लापरवाही से कंपनी को वित्तीय नुकसान हो रहा है और कोर्ट के अलावा उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था।
इस पूरे मामले पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, विभाग के अंदर इस घटना को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। यह देखा जाना बाकी है कि विभाग इस मामले को कैसे हल करता है और अदालत के आदेश का पालन कैसे करता है।
यह मामला सरकारी विभागों द्वारा निजी कंपनियों के प्रति जवाबदेही का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। अदालत के इस कदम से साफ संकेत मिलता है कि वित्तीय अनुशासन का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह सरकारी विभाग ही क्यों न हो।
यह घटना सरकारी विभागों की जिम्मेदारियों और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है। हेल्थ केयर डिवाइस बनाने वाली कंपनी ने जिस प्रकार अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी, वह अन्य छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए भी प्रेरणा है। कोर्ट के आदेश के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्वास्थ्य विभाग मामले को किस तरह हल करता है और ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।



