बिलासपुर में साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और पीड़ितों को समय पर राहत प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित रेंज स्तरीय साइबर कार्यशाला के चौथे सत्र का आयोजन 30 दिसंबर 2024 को किया गया। इस कार्यशाला का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन में हुआ। आयोजन स्थल “चेतना भवन,” रक्षित केंद्र, बिलासपुर में 127 प्र.आर. और आरक्षक स्तर के पुलिसकर्मियों को साइबर अपराधों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पुलिसकर्मियों को आधुनिक साइबर अपराधों की पहचान, विवेचना, और समाधान में दक्ष बनाना था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, व्हाट्सएप, और टेलीग्राम) पर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते साइबर अपराधों को रोकने और उनसे जुड़े तकनीकी पहलुओं को समझाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
प्रमुख बिंदु:
1. सोशल मीडिया अपराध:
प्रशिक्षुओं को सोशल मीडिया पर होने वाले अपराधों की पहचान, जांच, और समाधान के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इसमें तकनीकी डेटा एनालिसिस के उपयोग से अपराधियों को पकड़ने की प्रक्रिया पर चर्चा की गई।
2. ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी:
डिजिटल एरेस्ट, इन्वेस्टमेंट/ट्रेडिंग फ्रॉड, आमंत्रण एपीके फ्रॉड, PAN2.0 फ्रॉड, सिम स्वैपिंग, और हेल्पलाइन नंबर फ्रॉड जैसे वित्तीय अपराधों के बारे में बताया गया। पुलिसकर्मियों को इन अपराधों को रोकने और उनसे संबंधित मामलों की जांच करने की प्रक्रियाओं से अवगत कराया गया।
3. क्रिप्टोकरेंसी:
क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ते उपयोग और इससे जुड़े फाइनेंशियल फ्रॉड के बारे में प्राथमिक जानकारी दी गई। प्रशिक्षुओं को क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी को रोकने और जनता को जागरूक करने के लिए प्रशिक्षित किया गया।
प्रशिक्षण में योगदान देने वाले विशेषज्ञ
कार्यशाला में साइबर मामलों के विशेषज्ञ दीपमाला कश्यप (जोनल पुलिस अधीक्षक, विशेष शाखा, बिलासपुर), प्रशिक्षु उपपुलिस अधीक्षक रोशन नायक, विक्कू सिंह, चिरंजीव कुमार, और शिरीष तिवारी ने अपना योगदान दिया।
प्रशिक्षण से लाभान्वित जिले
बिलासपुर रेंज के जिलों से आए पुलिसकर्मियों में बिलासपुर के 24, रायगढ़ के 20, कोरबा के 31, जांजगीर-चांपा के 20, मुंगेली के 20, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के 3, सारंगढ़-बिलाईगढ़ के 13, और सक्ती के 16 कर्मचारी शामिल थे।
प्रशिक्षण का समापन और पुरस्कार वितरण
कार्यशाला के समापन पर प्रशिक्षणार्थियों से फीडबैक लिया गया और उनके ज्ञान का आकलन करने के लिए परीक्षा आयोजित की गई। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं को पुलिस महानिरीक्षक डॉ. संजीव शुक्ला द्वारा नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
यह कार्यशाला साइबर अपराधों के प्रति पुलिसकर्मियों की सतर्कता और उनके कौशल को उन्नत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मददगार हैं, बल्कि समाज में सुरक्षा की भावना को भी प्रबल करते हैं।


